राजधानी में बसंत पंचमी का उल्लास, गोविंददेवजी मंदिर सहित धार्मिक स्थलों पर पाटोत्सव और विशेष अनुष्ठान
जयपुर, 23 जनवरी । बसंत पंचमी के पावन अवसर पर शुक्रवार को राजधानी जयपुर सहित प्रदेशभर में धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों की धूम रही। जयपुर स्थित आराध्य देव श्री गोविंददेवजी मंदिर में पाटोत्सव भक्तिभाव और पारंपरिक विधि-विधान के साथ मनाया गया। अलसुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और पूरे वातावरण में कीर्तन, मंगल गीत और बधाई गान गूंजते रहे।
मंदिर में ठाकुर श्री गोविंददेवजी महाराज के प्राकट्य उत्सव के अवसर पर विशेष अभिषेक किया गया। बसंत पंचमी को ठाकुर श्रीजी के पुनः प्राकट्य की तिथि माना जाता है। भक्तिरत्नाकर ग्रंथ के अनुसार माघ शुक्ल पंचमी संवत 1582, अर्थात 1525 ईस्वी में श्रीधाम वृंदावन के गोमाटीला योगपीठ से ठाकुर श्रीजी का पुनः प्राकट्य हुआ था। यह प्राकट्य श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु के प्रथम शिष्य और षड्गोस्वामियों में प्रमुख श्रील रूप गोस्वामी के माध्यम से हुआ था। तभी से इस तिथि पर पाटोत्सव मनाने की परंपरा चली आ रही है।
बसंत पंचमी की सुबह ब्रह्ममुहूर्त में मंदिर के कीर्तनियों और परिकर जनों ने मंगल गीतों के साथ दिन की शुरुआत की। प्रातः चार बजे मंगला आरती हुई, जिसके बाद पाटोत्सव अभिषेक के दर्शन कराए गए। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंचामृत से ठाकुर श्रीजी का अभिषेक किया गया। अभिषेक के उपरांत मावा पेड़े का भोग अर्पित कर महाआरती संपन्न हुई। इस अवसर पर ठाकुर श्रीजी को विशेष भव्य पीली पोशाक और अलंकारों से श्रृंगारित किया गया।
धूप झांकी के दर्शन सुबह साढ़े आठ से पौने दस बजे तक हुए, जिसमें अधिवास पूजन और धूप आरती की गई। धूप झांकी में बेसन के लड्डू का भोग लगाया गया। इसके पश्चात श्रृंगार झांकी और राजभोग झांकी के दर्शन कराए गए। बसंतोत्सव की परंपरा के अनुसार ठाकुर श्रीजी को पांच प्रकार का गुलाल, इत्र और पुष्प माला अर्पित की गई तथा चंवर सेवा के बाद राजभोग आरती संपन्न हुई।
इसी क्रम में आस्था के पावन केंद्र श्री अमरापुर स्थान में भी बसंत पंचमी महोत्सव श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ मनाया गया। विद्या की देवी मां सरस्वती की विशेष पूजा-अर्चना की गई। प्रातः मां सरस्वती देवी एवं सद्गुरु टेऊंराम महाराज के समक्ष दीप प्रज्वलित कर केसर-कुंकू तिलक, पीले पुष्प और पीले व्यंजनों का नैवेद्य अर्पित किया गया। पूज्य सतगुरु स्वामी भगत प्रकाश महाराज के सान्निध्य में संत मंडल, विद्यार्थी वर्ग और गुरु प्रेमीजन पूजा में शामिल हुए। पूजन के उपरांत विद्यार्थियों को सरस्वती अभिमंत्रित पेंसिल और कलम भेंट की गई। इसके बाद प्रार्थना, भजन-संकीर्तन और सत्संग का आयोजन हुआ।
आचार्य पीठ श्री सरस निकुंज, दरिबा पान, सुभाष चौक में भी बसंत पंचमी महोत्सव शुक सम्प्रदाय पीठ के स्थापना दिवस के रूप में मनाया गया। इस अवसर पर नित्य सेवा-पूजन के साथ गुरु आचार्य सरकार की पादुका पूजन किया गया। ऋतु पुष्पों से श्रृंगार कर केसरिया खीर का भोग अर्पित किया गया। शुक सम्प्रदाय पीठाधीश अलबेली माधुरी शरण महाराज के सान्निध्य में राग बसंत में पदावलियों का गायन किया गया। वहीं श्री खोले के हनुमान मंदिर और परिसर स्थित वेद विद्यालय में भी बसंत पंचमी पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। वेद विद्यालय के विद्यार्थियों ने मां सरस्वती की विधिवत पूजा-अर्चना कर सामूहिक रूप से श्लोकों का उच्चारण किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित रहे।
उधर, बसंत पंचमी के शुभ अवसर पर राजधानी जयपुर में दुपहिया और चौपहिया वाहनों की खरीदारी भी जमकर हुई। शोरूमों में ग्राहकों की भारी भीड़ देखी गई। जेएलएन मार्ग सहित कई प्रमुख सड़कों पर नए वाहनों की लंबी कतारें लगी रहीं, जिससे कुछ समय के लिए यातायात प्रभावित हुआ। मोती डूंगरी गणेश मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी।
फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन (एफएडीए) के वाइस प्रेसिडेंट साईं गिरधर ने बताया कि फिलहाल वाहनों की बिक्री के अंतिम आंकड़े रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे। उन्होंने कहा कि बसंत पंचमी के दिन एक ही दिन में हुई वाहनों की डिलीवरी अपने आप में एक रिकॉर्ड मानी जा सकती है।









