appeal-youth-university

देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ दें: डॉ. अशोक कलवार

अजमेर, 24 जनवरी । महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय में ‘कर्तव्य बोध’ विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान में राजस्थान लोक सेवा आयोग के सदस्य डॉ. अशोक कलवार ने युवाओं और शिक्षकों से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। कार्यक्रम का आयोजन अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ की विश्वविद्यालय इकाई द्वारा किया गया, जिसकी अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. सुरेश कुमार अग्रवाल ने की।

डॉ. कलवार ने कहा कि शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि चरित्रवान नागरिकों का निर्माण करना है। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मात्र किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है; अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक सरोकारों के माध्यम से देश के विकास में योगदान देना आवश्यक है। उन्होंने भारतीय इतिहास के उदाहरणों—चाणक्य, भगवान राम, श्रीकृष्ण, भीष्म पितामह, छत्रपति शिवाजी, महाराणा प्रताप, गुरु गोविंद सिंह और सुभाष चंद्र बोस—का उल्लेख करते हुए कर्तव्यनिष्ठा को राष्ट्र की आत्मा बताया।

उन्होंने पंडित मदन मोहन मालवीय के त्यागपूर्ण प्रयासों से काशी विश्वविद्यालय की स्थापना का संदर्भ देते हुए समर्पण की प्रेरणा दी। एक एमबीबीएस छात्र द्वारा कैंसर और रक्त समूह पर प्रकाशित शोध पत्रों का उदाहरण प्रस्तुत कर युवाओं को शोध के प्रति प्रेरित किया। साथ ही बढ़ते अवसाद, नशे और मोबाइल लत जैसी चुनौतियों पर चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि पिछले वर्ष 350 मेडिकल छात्रों द्वारा आत्महत्या के मामले गंभीर संकेत हैं। उन्होंने “मिशन कर्मयोगी” और “नेशन फर्स्ट” का उल्लेख करते हुए 2047 तक भारत को विश्वगुरु बनाने में युवाओं की भूमिका निर्णायक बताई।

अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलगुरु प्रो. अग्रवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति कर्तव्य प्रधान रही है। उन्होंने जापान के अनुभव साझा करते हुए समयनिष्ठा को कर्तव्य बोध का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। गीता के संदेश का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि लाभ-हानि से परे कर्तव्य पथ पर चलना ही सफलता का मूल मंत्र है।

कार्यक्रम में कुलसचिव कैलाश चंद्र शर्मा, वित्त नियंत्रक नेहा शर्मा सहित विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षक, शोधार्थी और विद्यार्थी उपस्थित रहे। स्वागत उद्बोधन प्रो. सुभाष चंद्र ने तथा संचालन प्रो. अरविंद पारीक ने किया।