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फीस वसूली के लिए विद्यार्थी के मूल दस्तावेज रोकना गलत, यह वसूली का साधन नहीं-हाईकोर्ट

याचिका में अधिवक्ता पुनीत सिंघवी ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता ने साल 2022 में जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी के एमबीबीएस कोर्स में प्रवेश लिया था। याचिकाकर्ता को तीसरे साल की पढाई के दौरान स्वास्थ्य कारणों से कोर्स को छोडना पडा। उसने सत्र 2024-25 तक की फीस भी जमा करा दी थी। वहीं अब उसने दिल्ली के एक विवि में डिजाइन कोर्स में दाखिला लिया है। इस विवि ने याचिकाकर्ता से शैक्षणिक मूल दस्तावेज मांगे। वहीं जब उसने पूर्व के विवि से अपने मूल दस्तावेज मांगे तो प्रशासन ने देने से इनकार कर दिया। जिसके चलते वह डिजाइन कोर्स के लिए आयोजित परीक्षा में शामिल नहीं हो पा रही है। जिसका विरोध करते हुए विवि प्रशासन की ओर से कहा गया कि पाठ्यक्रम में प्रवेश के समय याचिकाकर्ता और उसके अभिभावक की ओर से दिए शपथ पत्र से स्पष्ट है कि फीस किसी भी स्थिति में वापस नहीं होगी और कोर्स बीच में छोडने पर विवि शेष कोर्स की फीस बैंक गारंटी या पोस्ट डेटेड चेक के माध्यम से वसूल सके। यदि दस्तावेज लौटा दिए जाते हैं तो कोई भी छात्र आसानी से कॉलेज छोडक़र चला जाएगा और संस्थान को फीस वसूली के लिए परेशानी उठानी पडेगी। विवि ने कहा कि एमबीबीएस की सीटें सीमित संख्या में होती है और विद्यार्थी के कोर्स छोडऩे के बाद सीट खाली रह जाती है। जिससे विवि को वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता है। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने विवि प्रशासन को तत्काल मूल दस्तावेज लौटाने को कहा है।