अखलाक माॅब लिंचिंग केस में यूपी सरकार को झटका, केस वापस लेने की याचिका खारिज
दरअसल, 10 साल पूर्व गौतमबुद्ध नगर जनपद के थाना जारचा क्षेत्र के बिसाहड़ा गांव में एक अफवाह के बाद भीड़ ने 50 साल के मोहम्मद अखलाक को कथित तौर पर पीट-पीटकर मार डाला था। भीड़ का आरोप था कि अखलाक के परिवार ने बछड़े की हत्या कर उसका मांस खाया है। भीड़ का यह भी कहना था कि अखलाक ने घर में गोमांस रखा है। 28 सितंबर 2015 को हुई इस घटना की चर्चा देशभर में हुई थी। पुलिस ने जांच के बाद कुल 19 लोगों को इस मामले में आरोपित बनाकर हत्या, दंगा भड़काने और जान से मारने की धमकी देने जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया गया था। कानूनी लड़ाई के बीच अक्टूबर 2025 में उत्तर प्रदेश शासन ने अचानक एक बड़ा कदम उठाते हुए आरोपिताें के खिलाफ चल रहे आरोपों को वापस लेने के लिए कोर्ट में आवेदन दिया था। उत्तर प्रदेश शासन की ओर से काेर्ट से केस चार्जशीट में नामजद सभी 19 लोगों के खिलाफ आरोप वापस लेने की इजाजत मांगे जाने के कारण यह केस एकबार फिर सुर्खियों में आ गया था।
उप्र शासन की याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। अभियोजन पक्ष की दलीलें थी कि केस वापस लिया जाना चाहिए। हालांकि काेर्ट दलीलों से सहमत नहीं हुई। काेर्ट ने कहा कि अपील का कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है। कोर्ट ने अर्जी को महत्वहीन मानते हुए इसे खारिज कर दिया। इससे पहले काेर्ट ने दोनों पक्षों को सुना। साथ ही काेर्ट ने कहा कि मामले में अगली सुनवाई 6 जनवरी को होगी और प्रतिदिन सुनवाई करने की बात कही है। काेर्ट ने अभियोजन को आगे गवाहों के बयान दर्ज करने के निर्देश दिए। साथ ही पुलिस आयुक्त और डीसीपी ग्रेटर नोएडा को निर्देशित किया कि अगर गवाहों को सुरक्षा की आवश्यकता है तो उन्हें सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
काेर्ट के आदेश के बाद अखलाक के परिवार के अधिवक्ता युसूफ सैफी और अंदलीब नकवी ने बताया कि काेर्ट ने अभियोजन पक्ष की ओर से लगाई गई याचिका को निरस्त कर दिया है और सुनवाई के लिए 6 जनवरी का डेट दिया है। उन्होंने कहा कि हमें कोर्ट से न्याय मिला है और हमें आशा है कि आगे भी हमें कोर्ट से न्याय मिलेगा। इस अवसर पर मौजूद भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की नेता वृंदा करात ने भी काेर्ट को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह न्यायालय का बहुत बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि कोर्ट का यह आदेश न्याय के पक्ष में है। उन्होंने कहा कि इससे पूरे देश में एक महत्वपूर्ण संदेश जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने एक पूरी साजिद के तहत केस को वापस लेने का प्रयास किया था।









