मनरेगा में संशोधन के खिलाफ झामुमो ने दिया धरना, राष्ट्रपति के नाम उपायुक्त को सौंपा ज्ञापन
पश्चिमी सिंहभूम, 27 दिसंबर । महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) में केंद्र सरकार की ओर से किए गए संशोधन के फैसले के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने शनिवार को पश्चिमी सिंहभूम जिले में धरना-प्रदर्शन कर जोरदार विरोध दर्ज कराया।
धरना के दौरान झामुमो नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत केंद्र सरकार के इस निर्णय को गरीब और श्रमिक विरोधी करार दिया। प्रदर्शन के उपरांत झामुमो प्रतिनिधिमंडल ने उपायुक्त के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपते हुए मांग की कि श्रम विरोधी वीबी-जी राम जी अधिनियम-2025 को तत्काल प्रभाव से वापस लेने के लिए केंद्र सरकार को निर्देशित किया जाए।
धरना को संबोधित करते हुए झामुमो जिला अध्यक्ष सोनाराम देवगम ने कहा कि वर्ष 2005 से मनरेगा ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सुरक्षा की रीढ़ रहा है। यह अधिनियम ग्रामीण मजदूरों को मांग के आधार पर रोजगार का कानूनी अधिकार प्रदान करता है तथा ग्राम सभा और पंचायतों के माध्यम से विकेंद्रीकृत शासन व्यवस्था को मजबूत करता है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना में कटौती या उसे कमजोर करने का प्रयास केंद्र सरकार की गरीब, मजदूर और ग्रामीण विरोधी सोच को उजागर करता है। यदि इस कानून को समाप्त या सीमित किया गया, तो इसका सीधा असर लाखों ग्रामीण परिवारों की रोजी-रोटी पर पड़ेगा।
झामुमो के नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि केंद्र सरकार ने मनरेगा से जुड़े संशोधन को वापस नहीं लिया, तो पार्टी आंदोलन को और तेज करेगी और इसे राज्यव्यापी रूप दिया जाएगा।
धरना-प्रदर्शन में झामुमो के कई वरिष्ठ नेता, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। इस अवसर पर भुवनेश्वर महतो, राहुल आदित्य, इकबाल अहमद, दीपक कुमार प्रधान, विकास गुप्ता, अकबर खान, प्रेम मुंडरी, रामलाल मुंडा, मिथुन गागराई, निसार हुसैन, विनय प्रधान, मन्नाराम कुदादा, विश्वनाथ बाड़ा, बंधना उरांव, कांडे तियु, मो. मोजाहिद, प्रेम गुप्ता, सनातन पिंगुवा, मंजीत हांसदा सहित अनेक कार्यकर्ता मौजूद रहे।————–









