धर्मांतरण विरोधी कानून को चुनौती, सुप्रीम कोर्ट का राजस्थान सरकार को नोटिस
यह याचिका पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज और दूसरे याचिकाकर्ताओं ने दायर की है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील संजय पारिख ने कहा कि इस कानून के प्रावधान मनमाने, अनुचित, अवैध और संविधान के दायरे से बाहर हैं। याचिका में कहा गया है कि ये कानून संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21, 25 और 26 का उल्लंघन है। याचिका में कहा गया है कि यह कानून व्यक्तिगत आस्था और धर्म चुनने की स्वतंत्रता पर अत्यधिक सरकारी नियंत्रण लगाता है।
सुनवाई के दौरान राजस्थान सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एएजी शिवमंगल शर्मा ने कोर्ट को एक विस्तृत सूची सौंपी, जिसमें ट्रांसफर याचिकाएं और विभिन्न राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानूनों को चुनौती देने वाली याचिकाओं का जिक्र था। राजस्थान सरकार के इस कानून को चुनौती देने वाली यह चौथी याचिका है। इससे पहले भी दशरथ कुमार हिनुनिया, एम हुजैफा और जयपुर कैथोलिक वेलफेयर सोसायटी की याचिकाएं उच्चतम न्यायालय में लंबित हैं। इनकी याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय पहले ही नोटिस जारी कर चुका है।









