बरेली में जुलूस के दौरान सिर तन से जुदा का नारा लगा पुलिस पर हमला करना राज्य पर हमला करना है : हाईकोर्ट

प्रयागराज, 13 नवम्बर । इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बरेली में जुलूस निकालने के दौरान सिर तन से जुदा का नारा लगाने और पुलिस पर हमला करने की घटना को गंभीरता से लेते हुए कहा कि पुलिस पर हमला करने का मतलब राज्य पर हमला करना है।

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अजय भनोट एवं न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने घटना के मुख्य आरोपित अदनान व एक अन्य याचिका खारिज़ करते हुए की।

इससे पूर्व कोर्ट इसी मामले के गौहर खान व शाकिब जमाल की याचिका खारिज़ कर चुकी है। अपर महाधिवक्ता व अपर शासकीय अधिवक्ता प्रथम ने याचिका का विरोध किया। अपर महाधिवक्ता ने कहा कि आरोपितों ने न सिर्फ उन्मादी नारे लगाए बल्कि पुलिस पर हमला किया, जिससे दो कांस्टेबलों को चोट आई। उनकी वर्दी भी फाड़ दी गई। भीड़ में शामिल लोग बड़ी घटना को अंजाम देने की कोशिश में थे और याची उनका नेतृत्व कर रहा था।

मामले के तथ्यों के अनुसार कानपुर में आई लव मोहम्मद मामले को लेकर की गई कार्रवाई के विरोध में 26 सितंबर को आईएमसी के मौलाना तौकीर रज़ा के आह्वान पर इस्लामिया कॉलेज ग्राउंड पर प्रदर्शन करने के लिए जुलूस निकाला गया। जुलूस में शामिल लोग सिर तन से जुदा के आपत्तिजनक नारे लगा रहे थे। पुलिस ने उन्हें रोका तो भीड़ हमलावर हो गई और पुलिसकर्मियों से मारपीट की गई। पुलिस ने इस मामले में 52 नामजद व कई अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

याचियों के वकील का कहना था कि याची घटना में शामिल नहीं थे। उन्हें बाद में इस मामले में झूठा फंसाया गया है। कोर्ट ने कहा कि पुलिस का काम राज्य में कानून व्यवस्था बनाए रखने का है यदि पुलिस पर हमला किया जाता है तो उसका अर्थ है राज्य पर हमला। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि ऐसे मामले में प्राथमिकी रद्द नहीं की जा सकती। प्रथम दृष्टया आरोप गंभीर हैं और इसमें विवेचना की जरूरत है। साथ ही प्राथमिकी रद्द करने का कोई आधार नहीं है।