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जायका परियोजना के तहत किसानों को किया गया जागरूक

उन्हें बताया गया कि पारंपरिक खेती के साथ सब्जियों और मसालों जैसी फसलों का उत्पादन कर आय में वृद्धि की जा सकती है। साथ ही, स्थानीय बाजारों और सब्जी मंडियों से जुड़े रहने पर जोर दिया गया, ताकि उपज का उचित मूल्य प्राप्त हो सके। कार्यक्रम में कुहल निर्माण, उसका रखरखाव और सिंचाई व्यवस्था के महत्व को भी मनोरंजक शैली में समझाया गया। एसएचईपी के तहत सिर्फ फसल उगाने नहीं, बल्कि बाजार की मांग के अनुसार फसल उगाने का संदेश किसानों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया गया।

कार्यक्रम में डा. राजेश कुमार खंड परियोजना प्रबंधक, कृषि विशेषज्ञ अमित शर्मा, भामिनी शर्मा, कृषक विकास संघों के प्रतिनिधि तथा क्षेत्र के किसान उपस्थित रहे।