उपराष्ट्रपति ने दलों के नेताओं से की मुलाकात, राज्यसभा के सुचारू संचालन में सहयोग की अपील

उपराष्ट्रपति कार्यालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार सभापति ने सदस्यों से आग्रह किया कि वे लोक महत्व के मुद्दों को उठाने के लिए शून्यकाल, विशेष उल्लेख और प्रश्नकाल जैसे उपलब्ध साधनों का पूरा उपयोग करें। उन्होंने कहा कि भारत का संविधान और राज्यसभा की नियमावली संसदीय संवाद की लक्ष्मण रेखा निर्धारित करती है।

उपराष्ट्रपति ने इस बात पर ज़ोर दिया कि सदन में हर दिन, हर घंटे, हर मिनट, हर सेकंड का उपयोग लोकतंत्र को मज़बूत करने के लिए किया जाना चाहिए। राधाकृष्णन ने सभी नेताओं को उनकी अंतर्दृष्टि और भागीदारी के लिए धन्यवाद दिया और इस बातचीत को एक बड़ी सफलता बताया।

संसद भवन एनक्सी में आयोजित मुलाकात के बाद कुछ सदस्यों ने पत्रकारों से बातचीत की। इसमें उन्होंने कहा कि सभापति से उनकी पहली मुलाकात काफी सकारात्मक रही। सभी दल राज्यसभा को सुचारू रूप से चलाने में उनका सहयोग करेंगे। वे अपेक्षा करते हैं कि सभापति पक्ष एवं विपक्ष के साथ समान व्यवहार करेंगे।

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि आज औपचारिक परिचयात्मक बैठक थी। एक अच्छी परंपरा शुरू हुई है जिसमें सभापति ने सबकी बात सुनी और सभी के विचार जाने। इसमें इसपर सहमति बनी कि सदन की कार्यवाही शांतिपूर्ण ढंग से चले। विपक्ष की ओर से आग्रह रहा कि सार्वजनिक महत्व के मुद्दों पर चर्चा हो। हमें अपनी बात रखने का मौका दिया जाए। सभापति ने आश्वासन दिया है कि वे सभी सुझावों पर गंभीरता से विचार करेंगे और सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चले, इसके लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

द्रमुक सांसद तिरुचि शिवा ने कहा कि सभापति के साथ एक अच्छा परिचय सत्र रहा। हमें उम्मीद है कि सदन के सुचारू संचालन के लिए वे पक्ष एवं विपक्ष के साथ समान व्यवहार करेंगे। हमने स्पष्ट किया कि हमारा कार्यवाही में बाधा डालने का कोई इरादा नहीं है।