शहर में बरसा धन, व्यापारियों के चेहरे खिले

छोटी रास के सोने-चांदी के आभूषण हो या छोटी रास के बर्तन, लोगों ने मुहूर्त में कुछ न कुछ खरीदा अवश्य। भारी भीड़ उमडऩे के चलते पुराने शहर में जहां निकास चौराहा से ही तीन एवं चार पहिया वाहनों को प्रतिबंधित कर दिया गया वहीं निकास से तेलीवाड़ा, कण्ठाल होकर नई सडक़ तक केवल दो पहिया वाहनों को ही आने-जाने की अनुमति दी गई। पुलिस ने स्टॉपर लगाकर नरेंद्र टॉकीज घाटी से ही आगे के रास्तों को बंद कर दिया था,ताकि कण्ठाल तक निर्माण कार्य तोड़े जाने में आसानी रहे। यही हालात कण्ठाल से छत्रीचौक, छत्रीचौक से गोपाल मंदिर होकर कमरी मार्ग चौराहा और गोपाल मंदिर होकर पटनी बाजार होकर गुदरी तक के रहे। अंदर लखेरवाड़ी क्षेत्र में महिलाओं की खासी भीड़ रही। शाम ढलते ही जहां मकानों की मुण्डेरों पर दीप जगमगाने लगे वहीं विद्युत लडिय़ां उसमें चार चांद लगाती रही। आतिशबाजों ने भी देर रात तक शहर के आसमान को गुंजाया।