आरोग्य भारती मंडी ने मनाई भगवान धन्वंतरि की जयंती
इस अवसर पर हरीश वैद्य ने भगवान धन्वंतरि के बारे मे जानकारी दी। डा. ओम राज शर्मा प्रांत स्वास्थ्य प्रवोधन प्रमुख ने भगवान धन्वंतरि के अवतरण दिवस पर प्रकाश डालते हुए कहा कि धन्वंतरि आयुर्वेद के प्रणेता तथा चिकित्सा शास्त्र के देवता माने जाते हैं। भारतीय पौराणिक दृष्टि से धनतेरस को स्वास्थ्य ,आरोग्य, सेहत, आयु और तेज के देवता धन्वंतरि का दिवस माना जाता है। इस दिन भगवान धन्वंतरि जी से समस्त जगत् को निरोग कर मनुष्य को दीर्घायु प्रदान करने की प्रार्थना की जाती है पौराणिक कथाओं के अनुसार देवता एवं दानवों द्वारा समुद्र मंथन से हाथ में अमृतपूर्ण स्वर्ण कलश लिए श्याम वर्ण, चतुर्भुज भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए।भगवान विष्णु के समान भगवान धन्वंतरि ऊपर की दोनों भुजाओं में शंख और अमृत कलश है। तीसरे हाथ में आयुर्वेद संहिता और चौथे हाथ में औषधि है। अमृत-वितरण के पश्चात् देवराज इन्द्र की प्रार्थना पर भगवान धन्वंतरि ने देवताओं के चिकित्सक देव – वैद्य का पद स्वीकार कर लिया।
अमरावती उनका निवास बना बाद में पृथ्वी पर रोग जरा से पीड़ित आमजन के उपचार के लिए प्रजापति इंद्र की प्रार्थना पर भगवान धन्वंतरि ने काशी के राजा दिवोदास के रूप में पृथ्वी पर अवतार धारण किया। इनकी धन्वंतरि-संहिता आयुर्वेद का मूल ग्रंथ है। आयुर्वेद के आदि आचार्य सुश्रुत एवं अन्य ऋषियों ने धन्वंतरि से ही चिकित्सा एवं आयु के विज्ञान का उपदेश प्राप्त किया था।महासचिव दुर्गेश शर्मा ने सब का आभार व्यक्त किया।









