पीएम विकसित भारत रोजगार योजना : आत्मनिर्भर, सशक्त, अवसरों से परिपूर्ण भारत गढ़ने का संकल्प
भारत आज उस ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ा है जहाँ से उसकी दिशा सीधे वैश्विक महाशक्ति बनने की ओर जाती दिखाई देती है। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद से बीते पचहत्तर वर्षों में देश ने तमाम उतार-चढ़ाव देखे, लेकिन हाल के वर्षों में जिस गति से भारत ने अपनी आर्थिक, सामरिक, तकनीकी और सामाजिक क्षमता को परिपक्व किया है, वह किसी भी राष्ट्र के लिए अनुकरणीय उदाहरण है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल क़िले की प्राचीर से की गई घोषणा इसी यात्रा की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना न केवल एक नीतिगत पहल है, बल्कि यह उस व्यापक दृष्टि का हिस्सा है जिसके अंतर्गत भारत को आत्मनिर्भर, सशक्त और अवसरों से परिपूर्ण समाज के रूप में गढ़ने का संकल्प लिया गया है। साथ ही प्रधानमंत्री मोदी की यह घोषणा उस विश्वास का प्रतीक है कि भारत का भविष्य उसके युवाओं में निहित है। यह विश्वास ही हमें उस लक्ष्य तक ले जाएगा जहाँ भारत न केवल अपने नागरिकों के लिए समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करेगा बल्कि विश्व को भी शांति, प्रगति और मानवीय मूल्यों की दिशा दिखाएगा।
यह योजना 1 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय से लागू की जा रही है और इसके अंतर्गत आने वाले दो वर्षों में 3.5 करोड़ रोजगार सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। पहली नज़र में यह घोषणा महज एक सरकारी कार्यक्रम लग सकती है, लेकिन गहराई से देखें तो यह भारत की बढ़ती अर्थव्यवस्था, उसकी सामाजिक संरचना और वैश्विक नेतृत्व की आकांक्षाओं से सीधे जुड़ी हुई है। क्योंकि किसी भी राष्ट्र के महाशक्ति बनने का मार्ग उसके युवाओं के हाथों से होकर गुजरता है। युवाओं के लिए भी यह अवसर है, उन्हें सामाजिक सुरक्षा कवच मिला हुआ है, जिसमें कि यदि उनके श्रम को उचित सम्मान प्राप्त है तो न केवल उनकी व्यक्तिगत समृद्धि होती है, बल्कि राष्ट्र का सामूहिक उत्थान भी सुनिश्चित होता है।
आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और नीतिगत आकलनों के अनुसार जो अतिशीघ्र दुनिया की तीसरी अर्थ व्यवस्था बन जाएगा। यह केवल आंकड़ों की बाज़ीगरी नहीं है, बल्कि इस तथ्य का प्रमाण है कि भारत का उत्पादन, उसका निर्यात, उसकी सेवा-क्षमता और उसका घरेलू बाज़ार अभूतपूर्व विस्तार की ओर अग्रसर है। ऐसे समय में जब पश्चिमी देशों की अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से जूझ रही है, भारत की विकास दर सबसे ऊँचे स्तर पर बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक जैसे संस्थान भी स्वीकार कर चुके हैं कि विश्व की आर्थिक वृद्धि का सबसे बड़ा इंजन आज भारत है।
इसके साथ ही भारत की विदेश नीति और वैश्विक छवि भी आज ऐसी है जो हमारे महाशक्ति बनने की संभावनाओं को बल देती है। अमेरिका, यूरोप और जापान जैसे विकसित राष्ट्र भारत को अपने विश्वसनीय साझेदार के रूप में देखते हैं। ब्रिक्स और जी-20 जैसे मंचों पर भारत की नेतृत्वकारी भूमिका स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। रक्षा उत्पादन, अंतरिक्ष तकनीक, डिजिटल अर्थव्यवस्था और हरित ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भारत ने जो प्रगति की है, वह आने वाले वर्षों में विश्व को दिशा दिखाने वाली होगी। ऐसे में यदि देश का आंतरिक ढाँचा, विशेषकर रोजगार और सामाजिक सुरक्षा का ढाँचा मज़बूत होता है तो भारत के लिए वैश्विक महाशक्ति बनने का मार्ग और भी सरल हो जाएगा।
वर्तमान में जो दिखाई दे रहा है, उसके अनुसार लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री मोदी ने जो कहा, उसमें यह विकसित भारत रोजगार योजना भारत की वृद्धि को और अधिक गहराई तक समाज में पहुँचाने का माध्यम बनेगी। इसका भाग ‘ए’ सीधे उन युवाओं को लक्षित करता है जो पहली बार रोजगार की दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं। ऐसे युवा, जो अभी-अभी शिक्षा पूरी करके जीवन की नई पारी की शुरुआत कर रहे हैं, उन्हें दो किस्तों में पंद्रह हज़ार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह न केवल उनके आर्थिक बोझ को हल्का करेगा, बल्कि उन्हें वित्तीय साक्षरता के महत्व से भी अवगत कराएगा। योजना का यह पहलू महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारे देश में युवा अक्सर नौकरी मिलने के बाद भी बचत और निवेश की आदत विकसित नहीं कर पाते। इस प्रोत्साहन राशि का एक हिस्सा बचत खाते में जमा रहना अनिवार्य होगा, जिससे उनमें वित्तीय अनुशासन की आदत डाली जा सके।
योजना का दूसरा भाग नियोक्ताओं को प्रोत्साहित करने वाला है। जब तक उद्योग और सेवा क्षेत्र नए रोजगार सृजित नहीं करेंगे, तब तक युवाओं के सपनों को ठोस धरातल नहीं मिल सकता। सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह नियोक्ताओं पर बोझ कम करने के लिए तैयार है। यदि कोई कंपनी नए कर्मचारी नियुक्त करती है और उसका वेतन एक लाख रुपये तक है, तो सरकार दो वर्षों तक प्रति कर्मचारी तीन हज़ार रुपये प्रतिमाह की सहायता करेगी। विनिर्माण क्षेत्र को विशेष प्राथमिकता देते हुए इस प्रोत्साहन को चार वर्षों तक बढ़ाने की व्यवस्था की गई है। यह व्यवस्था स्पष्ट करती है कि भारत केवल सेवा क्षेत्र पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को गति देकर विनिर्माण को भी अपनी आर्थिक रीढ़ बनाना चाहता है।
आज देखने में आ रहा है कि केंद्र सरकार की अधिकांश प्रमुख योजनाएँ ज़मीनी स्तर तक पहुँच रही हैं। जनधन योजना, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएँ (पीएलआई) इसके उदाहरण हैं। इन योजनाओं ने समाज और अर्थव्यवस्था दोनों में परिवर्तन लाने का काम किया है। इसलिए प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना से भी यही अपेक्षा है कि यह न केवल घोषणाओं तक सीमित रहेगी, बल्कि युवाओं को वास्तविक अवसर भी उपलब्ध कराएगी। इसलिए यह कहना गलत नहीं होगा कि योजना का व्यापक प्रभाव भारत की सामाजिक संरचना पर भी पड़ेगा।
वस्तुत: यह भी एक तथ्य है कि हमारे देश में आज भी असंगठित क्षेत्र का हिस्सा बहुत बड़ा है। बड़ी संख्या में लोग बिना किसी सामाजिक सुरक्षा के अस्थायी कामों में लगे रहते हैं। लेकिन यह योजना सीधे ईपीएफओ से पंजीकृत कर्मचारियों और पैन-लिंक्ड खातों वाले नियोक्ताओं को लक्षित कर रही है। इसका अर्थ यह है कि करोड़ों युवा और लाखों कंपनियाँ औपचारिक अर्थव्यवस्था का हिस्सा बनेंगे। जब कार्यबल औपचारिक होता है तो उसे स्वास्थ्य बीमा, पेंशन, भविष्य निधि और अन्य सुविधाओं का लाभ मिलता है। इससे समाज में असमानता घटती है और आर्थिक सुरक्षा का दायरा बढ़ता है।
भारत के महाशक्ति बनने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण पहलू उसकी जनसांख्यिकी है। आज भारत की आधी से अधिक आबादी 30 वर्ष से कम आयु की है। यह ‘डेमोग्राफिक डिविडेंड’ हमारे लिए अवसर भी है और चुनौती भी। यदि इन युवाओं को पर्याप्त शिक्षा, कौशल और रोजगार उपलब्ध हो जाते हैं, तो वे न केवल भारत की अर्थव्यवस्था को नई ऊँचाइयों पर ले जाएंगे बल्कि विश्व स्तर पर भी भारतीय कौशल की धाक जमाएंगे। लेकिन यदि यही युवा बेरोजगारी और हताशा का शिकार हो गए तो सामाजिक अशांति की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है। इस दृष्टि से प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना समयोचित और दूरदर्शी कदम है। यह योजना भारत की उस दृष्टि को मूर्त रूप देती है जिसमें हर युवा को न केवल नौकरी बल्कि सम्मानजनक जीवन का अवसर मिलता हुआ दिखता है।
(लेखिका मप्र बाल अधिकार संरक्षण आयोग की सदस्य हैं)









