जबलपुरः मंत्री परमार ने जिज्ञासा जोनल कॉन्फ्रेंस को बताया आयुष के क्षेत्र में उल्लेखनीय पहल
उन्होंने कहा कि भारत के जीवन दर्शन में आयुष का विशेष महत्व है। ऋषि, मुनियों के शोध व दर्शन के परिणाम स्वरूप भारत का आयुर्वेद समृद्ध हुआ है। आयुर्वेद स्वस्थ्य जीवन व स्वस्थ्य शरीर का एक विज्ञान है। उन्होंने भारतीय ज्ञान परम्परा के अनुसार आयुष की प्रासंगिकता और महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
मंत्री परमार ने कहा कि ऐसे कॉन्फ्रेंस से चिकित्सा जगत को निश्चित ही फायदा होगा। आयुर्वेद भारतीय जीवन पद्धति का एक हिस्सा है और व्यवस्थित है, जो एक पीढी से दूसरी पीढी तक स्थानान्तरित होती है। इसमें इलाज की अनूठी पद्धतियां हैं, अत: इसका दस्तावेजीकरण आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद का काढ़ा कोविड के संक्रमण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लोगों के जीवन बचाने के लिए आयुर्वेद का प्रयोग करना चाहिए, ताकि आयुर्वेद नई उचाईयों को छू सके। उन्होंने कहा कि आयुष के अध्ययन के लिए वे नए कॉलेज खोलने का निर्णय लिया है, जिससे स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान की दिशा में और भी बेहतर तरीके से कार्य किया जा सकेगा।
कार्यक्रम के दौरान भाजपा नगर अध्यक्ष रत्नेश सोनकर व आयुष क्षेत्र के ख्यातिलब्ध विद्वानों सहित बड़ी तादात में आरोग्य विधा से जुड़े विद्यार्थी शामिल थे।









