राज्यसभा के सभापति ने न्यायाधीश को हटाने के प्रस्ताव और एक सीट पर नकदी मिलने पर जताई चिंता
सभापति ने सदन को जानकारी दी कि दिसंबर माह में संविधान के अनुच्छेद 124 के तहत एक उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को पद से हटाने के लिए 55 सदस्यों द्वारा एक प्रस्ताव उनके समक्ष प्रस्तुत किया गया था, लेकिन जांच में यह पाया गया कि एक सदस्य के हस्ताक्षर दो स्थानों पर हैं। जब उस सदस्य से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने दूसरे हस्ताक्षर को नकार दिया।
धनखड़ ने कहा, “यदि कोई प्रस्ताव एक ही सदस्य के दो हस्ताक्षरों के साथ प्रस्तुत होता है और सदस्य यह कहता है कि उसने केवल एक बार हस्ताक्षर किए हैं, तो यह मामला गंभीर और दंडनीय बन जाता है।”
सभापति ने बताया कि इस मामले की सत्यता जानने के लिए हस्ताक्षरों का सत्यापन और प्रमाणन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गयी है, जो फिलहाल प्रगति पर है। यदि 50 या अधिक सदस्य अपने हस्ताक्षर की पुष्टि करते हैं, तो प्रस्ताव पर विचार किया जाएगा। वहीं, दोहरी हस्ताक्षर वाली गड़बड़ी को अलग से गंभीरता से देखा जाएगा।
सभापति ने एक और चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि राज्यसभा की सीट संख्या 222 पर 500 रुपये के नोटों की एक गड्डी मिली थी। उन्होंने कहा, “चिंता की बात यह नहीं है कि नोट मिले, बल्कि यह है कि किसी ने अब तक इन पैसों का दावा नहीं किया है।” उन्होंने इस घटना को गंभीर बताते हुए कहा कि इसे अब और गहराई से देखा जाएगा और इस विषय को भी सदन के फ्लोर लीडर्स के सामने विचारार्थ रखा जाएगा।
धनखड़ ने सदस्यों से आग्रह किया कि इस सदन को जनता की उच्चतम अपेक्षाओं पर खरा उतरना चाहिए। उन्होंने कहा, “यदि हम इन घटनाओं को नजरअंदाज करते हैं और गहराई से जांच नहीं करते, तो यह सदन की गरिमा के विपरीत होगा।”
सभापति ने संकेत दिया कि इन दोनों मामलों पर सदन के फ्लोर लीडर्स के साथ विचार-विमर्श के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।









