हर पर्वत पर तिरंगा लहराने वाली IPS: पहली कोशिश में सफल, 9 साल में पिताजी का निधन!
महिला आईपीएस अधिकारी अपर्णा कुमार की जीवन यात्रा प्रेरणा और साहस का प्रतीक है। उनके द्वारा किए गए अद्वितीय कार्यों को देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि बुलंदियों तक पहुंचना तो महत्वपूर्ण है, लेकिन उन बुलंदियों पर ठहरना उससे भी बड़ा कमाल है। अपर्णा ने दुनिया की सबसे ऊंची चोटियों और दक्षिण ध्रुव को फतह कर यह साबित किया है कि किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए दृढ़ संकल्प और मेहनत की आवश्यकता होती है। आज वह लखनऊ में मानवाधिकार के आईजी के पद पर कार्यरत हैं और उनका अगला लक्ष्य उत्तरी ध्रुव पर चढ़ाई करना है।
अपर्णा कुमार का जन्म 30 अगस्त 1974 को कर्नाटक के शिमोगा में हुआ। उनके पिता, एचएन शिवराज, ने उन्हें छोड़ दिया जब वे केवल 9 वर्ष की थीं। उनकी मां, एस अश्वनी, ने अपर्णा की परवरिश में कोई कमी नहीं छोड़ी और उन्हें बेहतरीन शिक्षा प्रदान की। अपर्णा ने बैंगलुरू के राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री प्राप्त की और फिर इंफोसिस में जॉइन किया। वहां से निकलने के बाद उन्होंने सिविल सर्विसेज की परीक्षा की तैयारी शुरू की और 2002 में यूपीएससी क्वालिफाई कर आईपीएस के पद पर नियुक्ति हासिल की।
अपर्णा का करियर कार्यकुशलता और उत्कृष्टता से भरा रहा है। उन्होंने मसूरी के लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में सर्वोच्च अंक प्राप्त किए और कई पुरस्कार भी जीते। उनके पति संजय कुमार भी एक सफल व्यक्ति हैं और दोनों का विवाह तीन साल की सेवा के बाद हुआ। अपर्णा ने विभिन्न जिलों में तैनाती के दौरान कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया और पुलिसिंग के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया।
अपर्णा ने पर्वतारोहण के क्षेत्र में भी अपार सफलताएँ दर्ज की हैं। उन्होंने 2013 में लद्दाख की स्टोक कांगड़ी चोटी को फतह करने का गौरव प्राप्त किया, और इसके बाद उन्होंने विभिन्न महाद्वीपों के शिखरों पर चढ़ाई की। उनका साहसिक कार्य न केवल देश का नाम रौशन करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि महिलाओं के लिए सीमाएं कहीं भी नहीं हैं। माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करना उन सभी पर्वतारोही का सपना होता है जो इस रोमांच में रुचि रखते हैं, और अपर्णा ने इसे भी 2016 में हासिल किया।
उनकी यात्रा अंततः एक्सप्लोरर्स ग्रैंड स्लैम की ओर बढ़ रही है, जिसका मतलब है कि वे उत्तरी और दक्षिणी ध्रुव की यात्रा के साथ-साथ सात महाद्वीपों के सर्वोच्च शिखरों पर चढ़ाई का लक्ष्य रख रही हैं। उनका आधिकारिक कार्य कभी खत्म नहीं होता है, क्योंकि रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण उनकी उत्तरी ध्रुव की यात्रा अभी तक अधूरी है। अपर्णा का यह संकल्प उन्हें उनके क्षेत्र में अद्वितीय बनाता है, और वे विश्व के उन गिने-चुने लोगों में शामिल होंगी जिन्होंने यह उपाधि हासिल की है।
अपर्णा कुमार की कहानी जीवन में अनुशासन, मेहनत और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करने का उत्कृष्ट उदाहरण है। उनका यह कहना कि उनकी सफलता का सूत्र कठिन परिश्रम और अनुशासित प्रशिक्षण है, निश्चित रूप से हर किसी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।









