ट्रांसपोर्ट विभाग के अस्थाई कर्मचारी होंगे तीन दिवसीय हड़ताल पर 20 तारीख से!
**भास्कर न्यूज | जालंधर**: पंजाब रोडवेज, पनबस और पीआरटीसी के कॉन्ट्रैक्ट वर्कर यूनियन ने एक बार फिर पंजाब सरकार के खिलाफ अपने संघर्ष का एलान किया है। यूनियन के सूबा प्रधान रेशम गिल ने स्पष्ट किया है कि यदि सरकार ने 19 मई तक उनकी मांगों का समाधान नहीं किया, तो 20, 21 और 22 मई को तीन दिन की पूर्ण हड़ताल की जाएगी। उन्होंने बताया कि विभाग के अनुबंधित कर्मचारियों की विभिन्न मांगों के लिए समय-समय पर संघर्ष किया जाता रहा है, फिर भी सरकार और संबंधित अधिकारी इन मांगों की अनदेखी कर रहे हैं।
इससे पहले अकाली दल और कांग्रेस की सरकारों के समय भी यूनियन ने अपनी मांगों को लेकर आवाज उठाई थी, लेकिन अब आम आदमी पार्टी की सरकार में भी हालात में कोई सुधार नहीं आया है। रेशम गिल ने कहा कि जब भी राज्य में कोई संकट आता है, जैसे बाढ़, कोरोना महामारी या भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव, तब पंजाब रोडवेज के ये कच्चे मुलाजिम ही सबसे पहले अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। चाहे स्थिति कितनी भी चुनौतीपूर्ण क्यों न हो, ये कर्मचारी यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने में लगे रहते हैं।
यूनियन के सेक्रेटरी शमशेर सिंह ढिल्लों और अन्य नेताओं ने बताया कि मुख्यमंत्री ने पहले उम्मीद दिलाई थी कि एक कमेटी का गठन कर कच्चे मुलाजिमों को स्थायी बनाया जाएगा, लेकिन अब तक इस वादे को पूरा नहीं किया गया। हाल ही में पंजाब ट्रांसपोर्ट विभाग के मंत्री, सचिव और अन्य अधिकारियों के साथ बैठक में भी उनकी लंबित मांगों का समाधान नहीं किया गया। अब यूनियन ने तय किया है कि यदि 19 मई तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो वे अपनी हड़ताल की योजना पर आगे बढ़ेंगे।
20, 21 और 22 मई को होने वाली हड़ताल के दौरान, 22 मई को मुख्यमंत्री की रिहाइश के बाहर एक बड़ा धरना प्रदर्शन किया जाएगा। यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें फिर भी नहीं मानी गईं, तो वे बड़े पैमाने पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे। इस मीटिंग में बलजिंदर सिंह बराड़, जगजीत सिंह लिबड़ा और गुरप्रीत सिंह पन्नू जैसे अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे, जिन्होंने इस मुद्दे पर अपनी धारणा प्रस्तुत की और एकजुटता दिखाई।
इस स्थिति के बीच, पंजाब रोडवेज के कर्मचारी लंबे समय से अपनी स्थायी नौकरी की मांग कर रहे हैं, और उनका मानना है कि सरकार को उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेना चाहिए। हड़ताल का फैसला कर्मचारियों की तात्कालिक स्थिति को दर्शाता है, और यह देखना होगा कि क्या सरकार इस बार उनकी मांगों को लेकर सकारात्मक कदम उठाएगी।









