बाजवा केस की आज हाईकोर्ट में सुनवाई: गिरफ्तारी पर रोक, सरकार देगी जवाब!

पंजाब में कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रताप सिंह बाजवा पर आरोपों के चलते चल रहे विवाद का मामला अब पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट की सुनवाई के तहत आया है। आज (सात मई) को इस मामले की सुनवाई होगी, जिसमें बाजवा की ओर से पुलिस को अपने फोन का पासवर्ड न देने से संबंधित याचिका पर सरकार द्वारा जवाब पेश किया जाएगा। आपको बताते चलें कि इस समय बाजवा की गिरफ्तारी पर रोक लगी हुई है। हाईकोर्ट ने सरकार को नोटिस जारी करते हुए विवाद से बचने की सलाह दी है।

प्रताप सिंह बाजवा की जांच कार्यवाही मोहाली स्थित साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन द्वारा की जा रही है। अब तक उनसे दो बार पूछताछ की जा चुकी है, पहली बार 19 अप्रैल को और दूसरी बार 25 अप्रैल को, जब उनकी पूछताछ लगभग साढ़े छह घंटे चली। जानकारी के अनुसार, बताया गया है कि उनके पास एक बार फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया है, लेकिन बाजवा ने पुलिस के समक्ष पेश नहीं होने का निर्णय लिया है। उनके द्वारा मोबाइल फोन जमा करवाने के बाद, पुलिस ने उन्हें फोन का पासवर्ड बताने के लिए नोटिस भेजा था, जिस पर उन्होंने विरोध जताया है। उनका कहना है कि वह जांच में पूरा सहयोग दे रहे हैं और फोन का पासवर्ड बताना उनकी निजता का उल्लंघन है।

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब बाजवा ने एक टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू में कहा कि “पंजाब में 50 ग्रेनेड आए थे, जिनमें से 18 पहले ही इस्तेमाल हो चुके हैं, जबकि 32 बाकी हैं।” इस बयान के बाद, एक महिला पुलिस कर्मचारी की शिकायत पर मोहाली साइबर थाने में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। एफआईआर के बाद बाजवा से लंबी पूछताछ हुई थी, जिसमें उन्हें पुलिस के सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं देने के कारण अधिक संदेह के घेरे में लाया गया।

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए हैं और पूछा है कि बाजवा को यह जानकारियाँ कहाँ से मिली? उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षात्मक एजेंसियों के पास यह जानकारी नहीं है, तो क्या बाजवा आतंकवादियों से सीधा संपर्क रखते हैं। यह सवाल सरकारी कार्रवाई और पुलिस की जांच को और भी विवादास्पद बना रहा है।

इसके अलावा, कोर्ट में याचिका दायर किए जाने के बाद, बाजवा के समर्थकों ने चंडीगढ़ में विरोध प्रदर्शन किया, जिससे मामला और भी तूल पकड़ गया। इस मामले की पेचीदगी को देखते हुए, अब सभी की नजरें हाईकोर्ट के निर्णय पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि यह विवाद किस दिशा में जाएगा और प्रताप सिंह बाजवा के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी। अब सब कुछ इस सुनवाई के परिणाम पर निर्भर करता है, जिससे स्पष्ट हो सकेगा कि बाजवा अपनी निर्दोषता साबित कर पाएंगे या फिर कानून के दायरे में उनका सामना करना पड़ेगा।