वाराणसी गैंगरेप: बैडमिंटन खिलाड़ी का सपना देखती बिटिया अब लड़कों से क्यों डरती है?
29 मार्च को अचानक लापता हुई मेरी बेटी के प्रति पिता की चिंताएं और दर्द बयां करते हैं। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी, जो किताबें खरीदने के लिए एक सहेली के साथ घर से निकली थी, वापस नहीं आई। उन्होंने दोस्तों और रिश्तेदारों से मदद मांगी, लेकिन सभी प्रयास असफल रहे। अंततः 4 अप्रैल को पुलिस ने उन्हें सूचित किया कि उनकी बेटी को घर लौटाया गया है, लेकिन वह नशे में थी और उसकी हालत गंभीर थी। पिता ने बताया कि उनकी बेटी को सामान्य होने के लिए 48 घंटों का समय लग गया और जब उसने अपनी दास्तान सुनाई, तो परिवार के लोग बेहोश हो गए।
बेटी ने बताया कि उसे अपने कक्षा के चार दोस्तों ने बहला-फुसलाकर अगवा किया और उसके साथ लगातार हैवानियत की। पिता का दिल इस बात को सुनकर टूट गया कि उनकी बेटी पर 23 लड़कों ने दरिंदगी की और अंततः उसे सड़क किनारे फेंक दिया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने शुरुआत में उनकी कोई सहायता नहीं की। केवल मीडिया के दबाव में 7 अप्रैल को प्रकरण दर्ज किया गया। पिता ने यह भी बताया कि अब उनकी बेटी घर के अन्य लड़कों को देखकर डर जाती है और चीख उठती है।
पिता ने इस दुर्योग के बारे में विस्तार से बताया कि पुलिस की मदद के अभाव में वह लगातार अपनी बेटी को ढूंढने का प्रयास करते रहे। 4 अप्रैल को जब उन्हें सूचना मिली कि उनकी बेटी मिल गई है, तो उनकी खुशियां पलभर में चिंता में बदल गईं जब उन्होंने देखा कि वह नशे में है और पहचानने की स्थिति में नहीं थी। उन्होंने न केवल अपनी बेटी का अपमान सहा, बल्कि उसे देखने के बाद परिवार के अन्य सदस्यों पर भी मानसिक तनाव का प्रभाव पड़ा।
6 अप्रैल को जब बेटी होश में आई, तो उसने अपने साथ हुए घटनाक्रम को साझा किया। उसकी बताई गई बातें सुनकर परिवार के अन्य सदस्य दंग रह गए और उनके लिए इसे समझना मुश्किल हो गया कि क्या किया जाये। पिता ने पुलिस को सभी जानकारी दी, लेकिन सफलता की कोई गारंटी नहीं थी। अब उनकी बेटी मानसिक तनाव से गुजर रही है, और पूरा परिवार खौफ में है।
गैंगरेप मामले में पुलिस ने 23 आरोपियों में से 9 को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तारी और मेडिकल परीक्षण की प्रक्रिया नाटकीय रही। बच्चों से लेकर कारोबारियों तक कई लोग इस मामले में शामिल हैं। एक आरोपी पहले भी आपराधिक मामलों में शामिल रहा है। पुलिस के अनुसार, आरोपियों का कनेक्शन एक हुक्का बार से है, जिससे लड़की का धीरे-धीरे संपर्क बढ़ा था। कई बार नशे का भी इस्तेमाल किया गया ताकि वह विरोध न कर सके।
पिता का यह कहकर अंत होता है कि उनकी बेटी की जिंदगी और भविष्य पल में ही तबाह हो गया। उनकी ख्वाहिश थी कि वह एक खिलाड़ी बने, लेकिन उस दिन की दास्तान ने उनके सपनों को चुराने का काम किया। अब समाज में बदलते वक्त के साथ न्याय की उम्मीद की जा रही है कि इस घटना के आरोपियों को सख्त से सख्त सजा मिले।









