नशा मुक्त भारत: गांव और मोहल्ले बना नशा विरोधी अभियान के मजबूत स्तंभ!

**लुधियाना: पंजाब सरकार की नशा विरोधी मुहिम को मिल रहा व्यापक समर्थन**

पंजाब सरकार का नशा विरोधी अभियान गांवों और मोहल्लों में तेजी से फैल रहा है, जिसका महत्वपूर्ण उदाहरण हाल ही में भगत सिंह नगर, धांधरा रोड पर आयोजित एक जागरूकता कार्यक्रम है। इस कार्यक्रम में पंचायत सचिव डिंपल चावला, सरपंच अमरजीत कौर, तथा अन्य स्थानीय गणमान्य व्यक्तियों ने हिस्सा लिया। इनमें कुलवंत सिंह, सरबजीत सिंह, करमजीत कौर, सरवण सिंह, भुपिंदर सिंह सैनी, मलकीयत सिंह फरवाहा, रोशन लाल, मलकीत सिंह, राजिंदर सिंह राणू और सुरजीत सिंह शामिल रहे।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य नशे के दुष्प्रभावों के बारे में लोगों को जागरूक करना और समाज को इस समस्या के समाधान में भागीदार बनाना था। वक्ताओं ने अपनी बात रखते हुए कहा कि यह लड़ाई तभी प्रभावी होगी जब गांवों और घरों से लोग सशक्त होकर आगे आएंगे। नशे की लत ने समाज को कई समस्याओं में जकड़ रखा है, इसलिए हमें मिलकर इसके खिलाफ उठ खड़ा होना पड़ेगा।

कार्यक्रम में उपस्थित स्थानीय नागरिकों ने नशा मुक्ति के लिए अपनी सक्रिय भागीदारी की और यह वादा किया कि वे समाज को नशामुक्त बनाने के लिए काम करेंगे। इससे यह स्पष्ट होता है कि अब लोग अपने समुदाय की भलाई के लिए जागरूक हो रहे हैं और नशे के विकराल समस्या को खत्म करने का संकल्प ले रहे हैं।

प्रयासों की यह श्रृंखला दर्शाती है कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल सरकारी कदमों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे समाज के सभी वर्गों का समर्थन भी आवश्यक है। जब नागरिक, पंचायत सदस्य और स्थानीय नेता एकजुट होकर नशामुक्त समाज का सपना देखते हैं, तब यह संभव है। कार्यक्रम में बताये गए विभिन्न तरीकों से नशा मुक्ति के संकल्प को साकार करने के लिए एक सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है।

इस प्रकार का जागरूकता कार्यक्रम अन्य गांवों और मोहल्लों में भी आयोजित किया जाना चाहिए ताकि नशे के दुष्प्रभावों को समझते हुए और अधिक लोग इस मुहिम में शामिल हों। पंजाब सरकार की यह पहल न सिर्फ नशा मुक्ति के प्रति जागरूकता फैलाने में सहायक है, बल्कि यह समाज के विकास की दिशा में एक सकारात्मक कदम भी है। इस लड़ाई में अगर सभी लोग मिलकर जुट जाएं, तो निश्चित ही समाज को नशे से मुक्त करने का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।