रोबिन की आत्महत्या: पत्नी ने ननद पर उत्पीड़न का सनसनीखेज आरोप!
**अमृतसर: रोबिन के आत्महत्या मामले में पत्नी ने ननद पर लगाए गंभीर आरोप**
अमृतसर के छेहर्टा क्षेत्र में आत्महत्या करने वाले युवक रोबिन के मामले में उसकी पत्नी दीपिका ने एक महीने बाद मीडिया के सामने आकर गंभीर आरोप लगाए हैं। दीपिका ने कहा कि उसकी ननद के प्रॉपर्टी की मांग की वजह से उनके पति रोबिन मानसिक तनाव का सामना कर रहे थे, जिसके चलते उन्होंने आत्महत्या की। इस घटनाक्रम ने न केवल परिवार के सदस्यों के बीच तनाव को उजागर किया है, बल्कि एक गंभीर सामाजिक मुद्दे को भी सामने लाया है।
दीपिका ने मीडिया को बताया कि उनके पति के साथ उनकी ननद का प्रॉपर्टी को लेकर लगातार विवाद था। उसने यह भी बताया कि उनके पति की खुशी का पल तब आया जब उन्हें 9 साल बाद एक बच्ची का जन्म हुआ। लेकिन, जब वह अपने मायके परिवार गईं, तो उन्होंने अपने ननद के सोशल मीडिया पर अपने पति की अनियोजित रस्म के बारे में एक संदेश देखा। चौंकाने वाली सूचना यह थी कि रोबिन ने ब्यास में एक होटल में जहरीली दवा खा कर आत्महत्या कर ली थी। इस खबर ने दीपिका को हतप्रभ कर दिया।
दीपिका ने आगे कहा कि उनके ससुर की दो साल पहले मृत्यु हो गई थी, उसके बाद भी ननद प्रॉपर्टी में हिस्सेदारी की मांग को लेकर झगड़ा करती रही। दीपिका ने बताया कि उनकी मृत्यु से पहले, उनके पति को मानसिक रूप से परेशान करने के लिए ननद ने कई बार उन्हें ताना मारा और परेशान किया। जब दीपिका घटना की जानकारी के बाद अपने घर पहुंचीं, तो उन्होंने देखा कि वहाँ से गहने, दुकान और प्रॉपर्टी से जुड़े सभी कागजात गायब थे, जो उनकी ननद ने ले लिए थे।
इस मामले में थाने के एसएचओ विनोद शर्मा ने पुष्टि की कि उन्हें दोनों पक्षों से शिकायतें प्राप्त हुई हैं। कहा गया है कि रोबिन की आत्महत्या का मुख्य कारण प्रॉपर्टी के विवाद को बताया जा रहा है, जबकि रोबिन के परिवार का कहना है कि पति-पत्नी के बीच व्यक्तिगत झगड़ा भी आत्महत्या की एक वजह हो सकती है। पुलिस द्वारा इस मामले की गहन जांच की जा रही है और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके अनुसार उचित कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने न केवल एक परिवार के भीतर विवाद को उजागर किया है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि प्रॉपर्टी के मामले में विवाद अक्सर खतरनाक मोड़ तक पहुंच सकते हैं। इस मामले ने समाज में व्यक्तिगत और पारिवारिक संबंधों के महत्व को भी चिंतन का विषय बनाया है। ऐसे संघर्षों को समाप्त करने के लिए सामाजिक जागरूकता और समझ की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाएं न हों।









