लुधियाना उप-चुनाव की बागडोर: कांग्रेस हाईकमान की नई दो सदस्यीय कमेटी नियुक्त
पंजाब के लुधियाना जिले के हल्का पश्चमी में उप-चुनाव की तैयारियाँ जोर-शोर से चल रही हैं। चुनाव आयोग द्वारा मतदान की तारीख का ऐलान जल्द ही किए जाने की संभावनाएँ हैं। इस चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों में हलचल बढ़ गई है। खासकर कांग्रेस ने इस उप-चुनाव की रणनीति को अंतिम रूप दे दिया है। देर रात की गई बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने मिलकर इस संदर्भ में आवश्यक निर्णय लिए हैं।
कांग्रेस की चुनावी रणनीति का संचालन तीन प्रमुख नेताओं – प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल, प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और विपक्ष के नेता प्रताप सिंह बाजवा के निर्देशन में हो रहा है। पार्टी ने राणा गुरजीत सिंह और शाम सुंदर अरोड़ा को एक दो-सदस्यीय समिति में शामिल किया है, जो इस उप-चुनाव की देखरेख करेगी। इसके साथ ही, कांग्रेस ने पूर्व कैबिनेट मंत्री भारत भूषण आशु को उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतारा है, जो पार्टी की ताकत को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
वहीं, आम आदमी पार्टी ने उप-चुनाव के लिए राज्य सभा सदस्य संजीव अरोड़ा को अपना उम्मीदवार घोषित किया है। उनका चुनाव मैदान में आना पार्टी के लिए एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है, जिससे राज्य में उनकी स्थिति और मजबूत होगी। दूसरी ओर, भाजपा और अकाली दल अब तक अपने उम्मीदवारों का चयन नहीं कर पाए हैं, जिससे उनकी चुनावी तैयारी पर सवाल उठेंगे।
भाजपा ने पहले ही पूर्व सांसद अविनाश खन्ना को उप-चुनाव का इंचार्ज नियुक्त किया है, जबकि विजय सांपला को सह-इंचार्ज बनाया गया है। इन दोनों नेताओं की देखरेख में भाजपा अपने चुनावी अभियान को प्रारंभ करेगी। अब देखना होगा कि कैसे ये राजनीतिक दल अपने-अपने चुनावी मुद्दों को प्रस्तुत करेंगे और मतदाताओं को अपने पक्ष में करने में सफल हो पाते हैं।
उप-चुनाव में भागीदारी न केवल लुधियाना के स्थानीय विकास पर प्रभाव डालेगी, बल्कि राज्य में राजनीतिक समीकरणों को भी बदलने में सक्षम हो सकती है। सभी पार्टी उतावले हैं और अपने-अपने उम्मीदवारों के जरिए जनता के बीच अपनी छवि और नीति को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की कोशिशों में जुटे हैं। ऐसे में यह चुनाव सिर्फ लुधियाना के लिए नहीं, बल्कि पूरे पंजाब की राजनीतिक दिशा को प्रभावित कर सकता है।









