परेश रावल का खुलासा: “विदू विनोद चोपड़ा की सफलता से टूटी मित्रता, तमीज सर्वोपरि”

बॉलीवुड के प्रसिद्ध अभिनेता परेश रावल ने हाल ही में विदू विनोद चोपड़ा के साथ अपने अनुभवों पर चर्चा की। उन्होंने खुलासा किया कि चोपड़ा ने जब अपनी सफलता हासिल की, तो उन्होंने अपने शुरुआती दोस्तों को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया। ललनटॉप को दिए गए एक इंटरव्यू में, परेश रावल ने कहा, “विदू विनोद चोपड़ा वह व्यक्ति हैं जिन्होंने अपनी ऊँचाइयों पर पहुंचने के बाद उन लोगों की अहमियत को भुला दिया, जिनके साथ उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की।”

परेश रावल ने उस समय की चर्चा की जब उन्हें “मुन्ना भाई MBBS” में बमन ईरानी का किरदार ऑफर हुआ था। उन्होंने आगे बताया, “मैं ‘मुन्ना भाई’ करने वाला था। जब हम फीस पर चर्चा कर रहे थे, तो मैंने सोचा कि मुझे 15 लाख रुपये चाहिए। विदू ने वही रकम ऑफर की, लेकिन जिस अंदाज में उन्होंने कहा ‘मैं तुम्हें 15 दूंगा’, वह मुझे असहज लगा। मैंने उनसे 50 लाख की मांग की और ठान लिया कि मैं अपनी डिमांड से पीछे नहीं हटूंगा।” इस दौरान, परेश ने वही किरदार “शंकर दादा MBBS” फिल्म में निभाया, जो कि “मुन्ना भाई MBBS” का तेलुगू संस्करण था।

इसके अतिरिक्त, परेश रावल ने “संजू” फिल्म में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो विदू विनोद चोपड़ा के प्रोडक्शन में बनी थी। परेश ने कहा, “यह केवल पैसे का मुद्दा नहीं था, बल्कि तमीज और इज्जत का सवाल था। यदि कोई व्यक्ति मेरे कंधे पर हाथ रखकर, अच्छी तरह बात करेगा, तो मैं एक रुपये के लिए भी काम करूंगा। लेकिन यदि कोई अहंकार और घमंड दिखाए, तो करोड़ों रुपये मिलने के बावजूद भी मैं उस फिल्म में काम नहीं करूंगा।”

परेश रावल के हालिया प्रोजेक्ट “द स्टोरीटेलर” के बाद, दर्शक उन्हें कई बड़ी फिल्मों में भी देखेंगे। आने वाले समय में वे “हाउसफुल 5”, “भूत बंगला”, “थामा”, और “हेरा फेरी 3” जैसी चर्चित फिल्मों में नजर आएंगे। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगा कि परेश रावल का करियर एक प्रेरणा है, जहां उन्होंने अपने सिद्धांतों और मूल्यों के लिए खड़े रहकर सफलता प्राप्त की है।

उनकी ये बातें फिल्म इंडस्ट्री के संघर्ष और समर्पण को दर्शाती हैं। निर्माता और अभिनेता के बीच में संबंधों का ये नाजुक पहलू भी सामने आता है कि काम के साथ-साथ व्यक्तिगत आदर और संबंधों की भी कितनी अहमियत होती है। परेश का यह कहना कि “तमीज और इज्जत” ही उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण हैं, यह दर्शाता है कि कला के क्षेत्र में भी मानवीय संबंधों की एक विशेष भूमिका है।