फाजिल्का में AAP चेयरमैन का कहर: सुपरवाइजर को डंडों से पीटा, गेहूं बोली रोकने का विवाद!

फाजिल्का जिले की अरणीवाला मार्केट कमेटी में एक बेहद चौंकाने वाला घटनाक्रम सामने आया है, जो सबको हैरान कर रहा है। मार्केट कमेटी के चेयरमैन पर उनके अधीनस्थ सुपरवाइजर के साथ शारीरिक हिंसा का गंभीर आरोप लगाया गया है। इस घटना के बाद पीड़ित सुपरवाइजर को तुरंत फाजिल्का के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। इस दुखद समाचार की जानकारी लगते ही अन्य मार्केट कमेटी अधिकारी और खरीद एजेंसियों के इंस्पेक्टर तुरंत अस्पताल पहुंचे ताकि स्थिति की गंभीरता का आकलन किया जा सके।

पीड़ित सुपरवाइजर गौरव मोंगा ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि चेयरमैन ने उन्हें अपने कार्यालय में बुलाया और वहां अपने कुछ सहयोगियों के साथ मिलकर उनकी डंडों से पिटाई की। गौरव ने यह भी कहा कि चेयरमैन की ओर से उन्हें पहले भी कई बार धमकी भरे नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इस विवाद का मुख्य कारण मंडी में गेहूं की बोली लगवाना था, जिसके खिलाफ चेयरमैन ने आपत्ति जताई थी। गौरव ने बताया कि उन्हें अपने खिलाफ हो रहे कई प्रकार के दबावों के कारण अपने तबादले की आवश्यकता महसूस हो रही है, क्योंकि आरोपी चेयरमैन सत्ताधारी पार्टी से संबंधित हैं, जिससे उन्हें न्याय की कोई उम्मीद नहीं है।

गौरव मोंगा का कहना है कि मंडी में गेहूं की बोली कराने से रोकने के लिए उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा था। घटना के बाद अस्पताल में डॉक्टर निखिल ने स्पष्ट किया कि उन्होंने इस मामले की सूचना संबंधित पुलिस अधिकारियों को दे दी है। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित की चोटों की गंभीरता का पता एक्स-रे के माध्यम से ही चल सकेगा। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मेडिकल टीम ने हर संभव एहतियात बरतने का फैसला किया है।

पुलिस द्वारा मामले की जांच कर रहे थाना अरनीवाला के एसएचओ अंग्रेज कुमार ने इस घटना की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि उन्हें मार्केट कमेटी चेयरमैन द्वारा सुपरवाइजर की पिटाई की सूचना मिली है और मामले को लेकर उन्होंने पीड़ित गौरव मोंगा के बयान के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। पुलिस मामले की पूरी गंभीरता से जांच कर रही है और उम्मीद है कि जल्द ही दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई की जाएगी।

इस घटना ने न केवल मार्केट कमेटी के भीतर एक विकट स्थिति उत्पन्न की है, बल्कि यह सोचने पर भी मजबूर कर दिया है कि क्या इस तरह की हिंसा को बर्दाश्त किया जा सकता है। समाज में ऐसी घटनाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी सरकारी कर्मचारी सुरक्षित महसूस करे और उसे अपने कर्तव्यों का पालन करने से ना रोका जाए।