अमृतपाल का हाईकोर्ट में एनएसए चुनौती: परिवार बेखबर, वकील जुटा रहे साक्ष्य!

खडूर साहिब से सांसद और खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह पर लागू राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) की अवधि को एक साल के लिए फिर से बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है। यदि 22 अप्रैल से पहले यह अवधि तीसरी बार बढ़ाई जाती है, तो अमृतपाल के परिवार के सदस्य पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं। इस विषय पर अमृतपाल के पिता, तरसेम सिंह ने गहरी नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि देश में सिख समुदाय के लिए अलग नियम लागू हो रहे हैं। उन्होंने एनएसए की अवधि बढ़ाने को लोकतंत्र और खडूर साहिब के मतदाताओं के साथ धोखेदारी करार दिया। उनके अनुसार, अमृतपाल के जेल में होने के बावजूद राज्य में अपराध और हिंसा की घटनाओं में कोई कमी नहीं आई है, जिससे सरकार के तर्कों की सच्चाई पर सवाल उठता है।

अमृतपाल के परिवार का दावा है कि उन्हें एनएसए के बढ़ाए जाने के निर्णय के बारे में कोई सूचना नहीं दी गई है। तरसेम सिंह ने कहा कि कुछ लोग नहीं चाहते कि अमृतपाल रिहा हों, क्योंकि उनकी गतिविधियों से कुछ लोगों के अवैध धंधे प्रभावित हो सकते हैं। इसका तात्पर्य है कि जब अमृतपाल बाहर आएंगे, तो उनके अवैध कारोबारों में रुकावट आएगी। इसके साथ ही, वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस बैंस ने एनएसए की अवधि बढ़ाने को सरकार की असफलता के रूप में प्रकट किया। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को अमृतपाल पर दर्ज एफआईआर में ट्रायल चलाना चाहिए। बैंस ने यह संकेत दिया कि वे इस निर्णय को एक बार फिर हाईकोर्ट ले जाने की योजना बना रहे हैं, वे पहले भी अमृतपाल पर एनएसए लगाने के मामले में कोर्ट में याचिका दायर कर चुके हैं।

पंजाब के गृह एवं न्याय विभाग ने इस मामले में अमृतसर के जिला मजिस्ट्रेट और खुफिया विभाग की रिपोर्टों के आधार पर अमृतपाल की हिरासत को बढ़ाने पर विचार कर रहा है। इसके लिए सलाहकार बोर्ड की सिफारिशों के बाद अंतिम निर्णय लेने की प्रक्रिया चल रही है। कहा जा रहा है कि यह निर्णय 22 अप्रैल तक ले लिया जाएगा। यदि अमृतपाल की हिरासत को स्थानांतरित करने का फैसला किया गया, तो पंजाब पुलिस की एक टीम पहले से ही असम के डिब्रूगढ़ में तैयार है।

अमृतपाल सिंह को 23 अप्रैल 2023 से हिरासत में लिया गया है। उसकी गिरफ्तारी के तुरंत बाद एनएसए लगाया गया था और उसे असम की डिब्रूगढ़ जेल में भेजा गया था। सरकार ने उसकी गतिविधियों को राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा मानते हुए यह कदम उठाया था। एनएसए की अवधि को समय-समय पर बढ़ाने की प्रक्रिया जारी थी, लेकिन अब एक बार फिर इसे बढ़ाने पर चर्चा चल रही है। यह घटनाक्रम राज्य की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के संदर्भ में गंभीर प्रश्न खड़े कर रहा है, और समाज में इस मुद्दे पर बहस भी तेज हो रही है।