कानपुर में हत्याकांड: शुभम की हत्या, बाल-बाल बचे पति, ऐशन्या की मां की दिल दहलाने वाली आपबीती!

बैसारन घाटी में एक कश्मीर यात्रा के दौरान हुई एक भयनक tragic घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। 31 वर्षीय शुभम द्विवेदी, जो अपनी पत्नी ऐशन्या और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ छुट्टियां मनाने गए थे, आतंकियों के हमले का शिकार हो गए। इस हमले में शुभम ने अपनी जान गंवाई और उनकी पत्नी को इस भयावह घटना को सहना पड़ा। यह घटना 22 अप्रैल को हुई, जबकि वे 23 अप्रैल को घर लौटने वाले थे। शुभम की मां सुनीता पांडेय ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा कि यह न केवल उनका दामाद था, बल्कि उनके लिए एक बेटा था जिसने उनकी जिंदगी में खुशियाँ भरी थीं।

घटनास्थल पर अस्त व्यस्तता और अराजकता का माहौल था। सुनीता ने बताया कि जैसे ही गोलियों की आवाज आई, वे अपने परिवार के साथ रेस्टोरेंट के वॉशरूम में छिप गए। जब उन्होंने बाहर का माहौल देखा, तो उन्होंने पाया कि कई लोग आतंकियों द्वारा गोलियों का शिकार हो रहे थे। सुनीता ने कहा कि इस स्थिति में उनका पति बाल-बाल बचे, लेकिन दामाद शुभम की जान नहीं बच पाई। फ़िर उन्होंने अपनी बेटी की मानसिक स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि वह बदहवास होकर कह रही थी, “मां, मुझे घाटी के नीचे फेंक दो।”

इस हमले ने न केवल शुभम के परिवार बल्कि पूरे देश को मर्माहत कर दिया है। उनकी मां ने बताया कि घाटी में हर तरफ लाशें पड़ी थीं। लोग आतंक से भागते हुए घायल हो रहे थे, जबकि घोड़े और खच्चर उन्हें कुचल रहे थे। घटना के समय यह भावना ऐसी थी जैसे पूरा क्षेत्र आतंकियों द्वारा घेर रखा गया हो। सुनीता ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वह और उनका परिवार इस यात्रा के लिए पहले से ही आशान्वित थे कि कश्मीर का माहौल अब सामान्य हो गया है, लेकिन अब उन्हें विश्वास है कि ये सिर्फ एक भ्रम था।

सुनीता ने इस घटना पर गहरी नाराजगी जताते हुए कहा कि कश्मीर में पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत दुखद है कि हम सत्ता में बैठे नेताओं से यह उम्मीद करने के बावजूद कि वे हमारे बच्चों को सुरक्षा देंगे, हमें ही ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ा। इसी के साथ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को पाकिस्तान के खिलाफ कठोर कदम उठाने होंगे, क्योंकि हर बार पाकिस्तान से हमलों की साजिशें होती रही हैं।

अंत में, शुभम की अंतिम यात्रा के दौरान उनकी पत्नी ऐशन्या ने अपनी भावनाओं का इजहार करते हुए कहा, “मुझे अकेला क्यों छोड़ गए?” सबको यह सोचने पर मजबूर कर दिया गया है कि इस तरह की आतंकवाद की घटनाओं से कैसे बचा जा सकता है। इस दर्दनाक घटना ने समाज को एक बार फिर से आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट होने और इस समस्या का सामना करने के लिए सक्रिय कदम उठाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला है।