संगरुर में डीएसपी ने किया किसानों का दौरा, पराली जलाने से बचने की अपील!

पंजाब के संगरूर जिले में, किसानों के बीच पराली प्रबंधन को लेकर जागरूकता फैलाने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान की अगुवाई संगरूर के एसएसपी सरताज सिंह चहल के सीधी दिशा निर्देशों पर की जा रही है। प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस अधिकारी, डीएसपी और एसपी सभी मिलकर किसानों को पराली जलाने से रोकने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। इस संबंध में, डीएसपी भवानीगढ़ राहुल कौशल ने कृषि और सहकारिता विभाग के साथ मिलकर कई गांवों का दौरा किया, जहां उन्होंने खेतों में काम कर रहे किसानों से बातचीत की और उनसे पराली जलाने की बजाय अन्य विकल्प अपनाने की अपील की।

डीएसपी राहुल कौशल ने बताया कि इस जागरूकता अभियान के अंतर्गत कंबाइन मशीन के मालिकों से भी संपर्क किया गया है। उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे फसल की कटाई का कार्य शाम छह बजे से अगले दिन सुबह दस बजे तक ना करें, जिससे पराली जलाने की संभावना कम हो सके। उन्होंने बताया कि उन्होंने गांव चन्नो, लक्खेवाल, नूरपुर, माझी और भडो जैसे क्षेत्रों का दौरा किया और किसानों को धान की पराली के प्रबंधन में उपयोगी मशीनरी के बारे में बताया। आसपास के गांवों के किसानों ने इस पहल पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी, जिससे यह दर्शाता है कि वे पर्यावरण की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं।

इस पहल में एडीसी अमित बैंबी का भी अहम योगदान है। उन्होंने एसडीएम भवानीगढ़ रविंदर बांसल और अन्य अधिकारियों के साथ मिलकर सकरौदी और खेड़ी गिललां में किसानों के लिए जागरूकता शिविर आयोजित किए। इन शिविरों में किसानों को पर्यावरण संरक्षित करने का संदेश दिया गया। अतिक्त तौर पर, उन्हें बताया गया कि पराली को जलाने की बजाय कृषि उपकरणों की मदद से मिट्टी में मिलाना न केवल पर्यावरण की रक्षा करने में सहायक है, बल्कि इससे मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ती है। इस संबंध में, बैंबी ने किसानों से अपील की कि वे पराली जलाने के खिलाफ इस अभियान में सक्रियता से शामिल हों।

इस जागरूकता कार्यक्रम के दौरान, किसानों को फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए उपलब्ध मशीनरी को उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया गया। प्रशासन और पुलिस द्वारा संचालित इस व्यापक अभियान का उद्देश्य किसानों में फसल अवशेषों के प्रभावी प्रबंधन के प्रति जागरूकता लाना है। इस पहल से न केवल पर्यावरण को लाभ होगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किसानों को उनके खेतों के प्रबंधन में सहूलियत मिलेगी।

फसल अवशेषों के प्रबंधन के लिए इन-सीटू और एक्स-सीटू विधियों का उपयोग करने के साथ-साथ, जागरूकता फैलाने का यह प्रयास संगरूर जिले में सकारात्मक परिवर्तन लाने की उम्मीद कर रहा है। प्रशासन और पुलिस के संयुक्त प्रयास से चलाए जा रहे इस अभियान के तहत, किसानों को उचित मार्गदर्शन और संसाधनों की जानकारी देकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश फैलाया जा रहा है।