पंजाब में कल हर स्कूल में मेगा PTM: CM और विधायक रहेंगे मौजूद, पंचायतें भी न्योताई गईं!
पंजाब के 20 हजार स्कूलों में कल एक बड़ा पीटीएम (पैरेंट-टीचर मीटिंग) आयोजित किया जाएगा, जिसमें सभी मंत्रियों और विधायकों के शामिल होने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री भगवंत मान स्वयं किसी एक स्कूल का दौरा करेंगे, जिससे इस आयोजन का महत्व बढ़ जाता है। यह जानकारी पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने सोमवार को पंजाब भवन में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दी। उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में चुनी गई पंचायतों को निमंत्रण दिया गया है कि वे भी इस पीटीएम का हिस्सा बनें, क्योंकि पंचायतों के सहयोग के बिना स्कूलों का विकास संभव नहीं है।
शिक्षा मंत्री ने जानकारी दी कि यह मेगा पीटीएम सुबह नौ बजे से शुरू होकर दोपहर ढाई बजे तक चलेगा। इस दौरान स्कूल में आने वाले पेरेंट्स का भव्य स्वागत किया जाएगा और स्कूलों को सुंदर तरीके से सजाया जाएगा। इस मीटिंग में पेरेंट्स को उनके बच्चों का रिजल्ट सौंपा जाएगा, जिससे उन्हें अपने बच्चों की प्रगति का सही आभास हो सके। बैंस ने कहा कि इस दौरान पेरेंट्स को बच्चों की कमियों और अच्छे प्रदर्शन के बारे में जानकारी दी जाएगी, साथ ही उनसे फीडबैक भी लिया जाएगा। यह फीडबैक स्कूलों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
हरजोत सिंह बैंस ने यह भी स्पष्ट किया कि पिछले साल आयोजित हुई पीटीएम में 19 लाख पेरेंट्स ने भाग लिया था। पंजाब में वर्तमान में स्कूलों में लगभग 27 लाख विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं। शिक्षा मंत्री ने पंचायतों के योगदान पर जोर देते हुए कहा कि स्कूलों के विकास और विभिन्न परियोजनाओं में पंचायतों का सहयोग अत्यंत आवश्यक है। खेल के मैदान की सफाई से लेकर विभिन्न कार्यों में पंचायतों की सक्रियता महत्वपूर्ण है।
इस आयोजन का उद्देश्य न केवल पेरेंट्स को स्कूलों की गतिविधियों में शामिल करना है, बल्कि उन्हें अपने बच्चों के विकास में सक्रिय रूप से भागीदार बनाना भी है। शिक्षा मंत्री ने कहा कि पिछले साल की पीटीएम में भी पेरेंट्स ने सहभागिता दिखाई थी, और इस बार अधिक से अधिक पेरेंट्स को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। स्कूलों की मैनेजमेंट कमेटी में सभी मेंबर होते हैं और पंचायतों का सहयोग भी इन कार्यों में आवश्यक है।
आशा है कि इस मेगा पीटीएम से बच्चों की शिक्षा और स्कूलों के विकास के लिए सहकार्य में नया अध्याय जुड़ सकेगा, जिससे राज्य के शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आ सके। इससे न केवल पेरेंट्स को अपने बच्चों की शिक्षा की जानकारी मिलेगी बल्कि स्कूल और पंचायतें मिलकर एक सशक्त समावेशी वातावरण बनाने में भी सफल होंगी।









