लुधियाना में 100 साल पुरानी इमारत ध्वस्त: धमाके से इलाका दहला, महिला-बच्चा घायल!
पंजाब के लुधियाना में आज एक 100 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत अचानक धराशायी हो गई। यह बिल्डिंग कई वर्षों से खस्ताहाल थी और इसके आस-पास रहने वाले लोगों ने इसे सुधारने के लिए कई बार बिल्डिंग के मालिक से अनुरोध किया था, लेकिन उसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। हादसे के समय एक महिला और एक डेढ़ साल का बच्चा मलबे के नीचे आ गए। महिला का सिर ईंटों से फट गया, जिससे उसे गंभीर चोटें आईं। यह घटना बंदिया मोहल्ले में घटित हुई, जहां प्रिंस कुमार अपनी पत्नी और बेटे के साथ रहते हैं।
प्रिंस ने बताया कि उनकी पत्नी और बेटा दरवाजे पर खड़े थे, जब बिल्डिंग गिरने लगी। तभी वह खुद तेजी से गली की ओर भागे, लेकिन उनकी पत्नी और बच्चा मलबे के अचानक गिरने से बच नहीं सके। इस बीच उनके घर की दीवार भी टूट गई और मलबा उनके घर में घुस गया। गंभीर रूप से घायल पत्नी खुशी अरोड़ा और बच्चे को तुरंत निकटवर्ती प्राइवेट अस्पताल ले जाया गया। खबर मिलते ही बिल्डिंग के मालिक को भी सूचित कर दिया गया।
घटनास्थल पर पूर्व पार्षद अनिल भारती भी पहुंचे, जिन्होंने घटना को विनाशकारी बताते हुए कहा कि कुछ अन्य लोगों को भी चोटें आई हैं। थाना डिवीजन नंबर 4 की पुलिस को सूचित किया गया है और राहत कार्य चल रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि यह बिल्डिंग तीसरी या चौथी मंजिल पर थी और इसकी हालत देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि यह काफी पुरानी है। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि बिल्डिंग के मालिक का पता लगाकर इस मामले में उचित कार्रवाई की जाए।
इस मामले की जांच के लिए नगर निगम को भी सूचित किया गया है, जिसके बिल्डिंग इंस्पेक्टर नवनीत ने कहा कि उन्होंने पहले ही बिल्डिंग के मालिक को नोटिस भेजे थे लेकिन उसने सुधार कार्य नहीं करवाया। इस घटना को देखते हुए नगर निगम अब विस्तृत जांच करेगा। घायल लोगों के बयान के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह घटना उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो खस्ताहाल इमारतों में रहने को मजबूर हैं, कि सुरक्षा को कभी भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
इस घातक हादसे ने एक बार फिर से उन इमारतों की स्थिति को उजागर किया है, जो वर्षों से उपेक्षित रहीं हैं। स्थानीय प्रशासन को चाहिए कि वे ऐसे भवनों की नियमित जांच करें ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से लोगों को बचाया जा सके। यह घटना न केवल उन परिवारों के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है जिनकी जिंदगी पल भर में तबाह हो गई, बल्कि समाज के लिए भी एक बड़ा प्रश्नचिन्ह है कि हम अपनी सुरक्षा के लिए क्या कदम उठा रहे हैं।









