पठानकोट में किसानों का हंगामा: बीजेपी विरोध, लखीमपुर खीरी घटना पर कार्रवाई की मांग!
पठानकोट में किसानों ने आज एक महत्वपूर्ण धरना प्रदर्शन आयोजित किया, जिसमें उन्होंने रेलवे ट्रैक को बंद करके अपना विरोध जताया। यह प्रदर्शन विशेष रूप से लखीमपुर खीरी में शहीद हुए किसानों के मामले में उचित कार्रवाई की मांग के लिए किया गया। किसानों ने इस दौरान केंद्र की बीजेपी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की, जिससे रेलवे ट्रैक लगभग दो घंटे तक जाम रहा। Farmers demand accountability regarding the tragic events in Lakhimpur Kheri and expressed their anger over the lack of action taken in this serious matter.
प्रदर्शन में शामिल किसान नेताओं ने बताया कि लखीमपुर खीरी में हुए एक घटना में बीजेपी नेता अजय डैनी मिश्रा के द्वारा किसानों को गाड़ी के नीचे कुचल दिया गया था, लेकिन अब तक इस मामले में किसी भी तरह की उचित कार्रवाई नहीं की गई है। प्रधान जसवंत सिंह, जनरल सेक्रेटरी करमजीत सिंह रंधावा, और अन्य नेताओं ने जोर देकर कहा कि ऐसी घटनाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि किसान इस अत्याचार के खिलाफ अब और सहन नहीं करेंगे।
इस विरोध प्रदर्शन में किसानों ने कंगना रनौत के बयानों का भी कड़ा विरोध किया। किसानों का कहना था कि कंगना ने पंजाब के किसानों के खिलाफ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया है। विशेषकर उनके द्वारा दिए गए बयान में यह कहा गया था कि पंजाब के लोग हिमाचल घूमने के लिए आने वाले सभी नशेड़ी हैं। किसानों ने इस तरह के विचारों को अस्वीकार्य बताया और कहा कि यह गलतफहमी और पूर्ण अपमान दर्शाता है।
किसानों ने कंगना रनौत की टिप्पणी को भी गुजरात में नशे के मामलों के बढ़ने से जोड़ा। उन्होंने बताया कि हालिया दिनों में गुजरात में नशे की बड़ी मात्रा में बरामदगी की गई है, और उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार को पंजाब पर इतनी नफरत है, तो उसे पंजाब को अलग करने पर विचार करना चाहिए। इस तरह के बयानों से किसान समुदाय में आक्रोश है और वे अपने अधिकारों के लिए आगे आने के लिए तैयार हैं।
इस प्रकार, पठानकोट में किसानों का यह धरना प्रदर्शन केवल एक स्थानीय मुद्दा नहीं था, बल्कि यह किसानों की एकता और उनकी आवाज को एकजुट करने का प्रयास था। किसानों ने साफ किया कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से लड़ाई जारी रखेंगे। उनका यह प्रदर्शन न केवल लखीमपुर खीरी की घटना के प्रति न्याय की मांग है, बल्कि यह एक व्यापक संदेश भी है कि केंद्रीय सरकार को किसानों की समस्याओं और उनके अधिकारों की चिंता करनी चाहिए।









