मोगा में किसानों का आक्रोश: लखीमपुर खीरी मामले पर रेलवे ट्रैक जाम, इंसाफ की गुहार!

लखीमपुर खीरी मामले के संबंध में भारतीय किसान यूनियन के सदस्य अन्य किसान संगठन के साथ मिलकर मोगा में रेलवे ट्रैक बंद करने की कार्रवाई कर रहे हैं। इस आंदोलन का आयोजन गैर संयुक्त किसान मोर्चा और किसान मजदूर मोर्चा द्वारा किया गया है, जिन्होंने दोपहर साढ़े बारह बजे के बाद रेलवे ट्रैक को जाम करने का निर्णय लिया। फिलहाल, किसान रेलवे स्टेशन और ट्रैक पर धरना दे रहे हैं। यह प्रदर्शन इसलिए किया गया है क्योंकि किसानों के मुताबिक, लखीमपुर खीरी के पीड़ितों को तीन वर्ष से न्याय नहीं मिला है और आरोपियों को अभी तक सजा नहीं हुई है।

किसानों ने इस घटना के संदर्भ में सरकार की आलोचना की है, उनका कहना है कि यह सरकार की विफलता है कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने में वह असमर्थ रही है। मोगा में का यह ट्रैक जाम न केवल स्थानीय क्षेत्र में बल्कि पूरे देश में किसान आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। किसानों का मानना है कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलता, तब तक वे अपने संघर्ष को जारी रखेंगे और इस प्रकार के विरोध प्रदर्शन करते रहेंगे।

इस स्थिति ने रेलवे सेवाओं को प्रभावित किया है, और सुरक्षाकर्मियों ने किसानों को रेलवे ट्रैक से हटाने के लिए प्रयास किए हैं। फिर भी, किसान नारेबाजी कर रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर अडिग हैं। भारतीय किसान यूनियन के नेताओं ने कहा है कि वे न्याय की मांग के लिए आगे भी इसी तरह के विरोध प्रदर्शन करते रहेंगे और स्थिति को लेकर केंद्र सरकार को कठोर संदेश भेजना जारी रखेंगे।

किसानों के इस आंदोलन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वे न्याय के प्रति कितने संवेदनशील हैं और अपनी आवाज उठाने के लिए वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। ऐसे में यह देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाएगी, ताकि किसानों का यह आंदोलन समाप्त हो सके और पीड़ित परिवारों को न्याय मिल सके।

किसान अदालती निर्णय का इंतजार कर रहे हैं और चाहते हैं कि इस मामले में त्वरित कार्रवाई की जाए। उनका मानना है कि अगर सरकार सही दिशा में काम करती है और लखीमपुर खीरी मामले में साक्ष्यों के आधार पर दोषियों को सजा दिलाने में सक्षम होती है, तो यह न केवल किसान समुदाय का विश्वास बढ़ाएगा, बल्कि न्याय की बाट जोह रहे पीड़ित परिवारों को भी राहत प्रदान करेगा।