पंधेर का बड़ा बयान: मांगें नहीं मानीं तो पंजाब बंद, गुरुवार को रेल नाकेबंदी!
पंजाब के जालंधर में आज किसान मजदूर मोर्चा के नेता सरवन सिंह पंधेर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया, जिसमें उन्होंने सरकार को कठोर आलोचनाओं का निशाना बनाया। इस अवसर पर पंधेर ने अपनी प्रमुख मांगों को स्पष्ट रूप से सामने रखा और सरकार से अनुरोध किया कि वे जल्द से जल्द इन मांगों पर ध्यान दें। पंधेर ने कहा कि वह 3 अक्टूबर को रेलवे ट्रैक को जाम करने का निर्णय ले चुके हैं, लेकिन यह सुनिश्चित किया कि यह नाकाबंदी केवल दो घंटे के लिए होगी ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंधेर ने पराली जलाने के मुद्दे पर भी केंद्र और पंजाब सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पराली जलाने से होने वाला प्रदूषण देश में केवल 2 प्रतिशत है, जबकि 98 प्रतिशत प्रदूषण के अन्य स्रोतों पर कोई चर्चा नहीं हो रही। पंधेर ने सवाल उठाया कि सरकार केवल किसानों के 2 प्रतिशत प्रदूषण पर ध्यान क्यों दे रही है, और उन्होंने सरकार से यह आग्रह किया कि उन्हें किसानों पर केस दर्ज करने के बजाय वास्तविक समाधान निकालना चाहिए।
किसान नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर सरकार समझती है कि केस दर्ज करने से समस्या का हल निकल सकता है, तो वह ऐसा कर सकती है, लेकिन असलियत यह है कि सरकार किसी ठोस समाधान की दिशा में कदम नहीं बढ़ा रही है। पंधेर ने अपने विचारों को साझा करते हुए कहा कि जरूरत इस बात की है कि समस्या को समझा जाए और हल निकाला जाए, न कि केवल कानूनी कार्रवाई की जाए।
पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए पंधेर ने सीएम भगवंत सिंह मान की कार्यशैली की तुलना पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह से की। उन्होंने कहा कि कैप्टन अमरिंदर सिंह किसानों के हितों के लिए चिंतित थे और उनके कार्यकाल में किसानों के लिए कई सकारात्मक कदम उठाए गए। हालांकि, उन्होंने यह भी व्यक्त किया कि वर्तमान मुख्यमंत्री भगवंत मान किसानों के लिए उतनी गंभीरता से कार्य नहीं कर पा रहे हैं, जितनी उम्मीद थी।
इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पंधेर ने अपनी आवाज को मजबूती से प्रस्तुत किया और स्पष्ट किया कि किसान अपनी मांगों के लिए संघर्ष करना जारी रखेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और सरकार को तत्काल कदम उठाने चाहिए। पंधेर का यह बयान न केवल पंजाब में किसानों की आवाज को जगाने का एक प्रयास है, बल्कि सरकार से तत्काल नीतिगत बदलाव की आवश्यकता को भी स्पष्ट करता है। ऐसे में यह देखना होगा कि सरकार उनकी मांगों पर कैसे प्रतिक्रिया देती है और क्या कोई समाधान निकाल पाती है।









