सरपंची के लिए दो करोड़ की बोली! हाईकोर्ट की सख्ती, चुनाव आयोग को निर्देश

पंजाब के गुरदासपुर जिले के हरदोवाल कलां गांव में सरपंची के लिए दो करोड़ रुपये की बोली लगाने का मामला अब पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में पहुंच गया है। गुरुवार को हुई सुनवाई में अदालत ने पंजाब राज्य चुनाव आयोग को इस मामले का समाधान निकालने के निर्देश दिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी अन्य जगह पर भी ऐसी ही शिकायतें आती हैं, तो लोग सीधे चुनाव आयोग से संपर्क कर सकते हैं। इसके बाद भी यदि समस्या का समाधान नहीं होता है, तो याचिकाकर्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं। यह याचिका एडवोकेट सतिंदर कौर द्वारा प्रस्तुत की गई थी।

याचिकाकर्ता ने अदालत में बताया कि पंजाब में इस समय पंचायत चुनाव चल रहे हैं और मतदान की प्रक्रिया 15 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। इस दौरान कई जगहों पर सरपंच पद के लिए बोली लगाई जा रही है, जिसका स्पष्ट उदाहरण हरदोवाल कलां का मामला है, जहां सरपंच पद के लिए 2 करोड़ की बोली लगी है। याचिका में यह भी कहा गया कि सरपंच पद का किसी प्रकार से विक्रय करना असंवैधानिक है और इससे चुनावी आचार संहिता का उल्लंघन हो रहा है। इसी संदर्भ में अदालत से निर्देश देने का निवेदन किया गया है।

ज्ञात हो कि हरदोवाल कलां में सरपंच पद के लिए बोली लगाने वाले भाजपा नेता आत्मा सिंह थे। उनका दावा है कि इस बोली के लिए सभी गांववासियों ने अपनी सहमति दी थी। वहीं, गांव की युवा सभा का कहना है कि इस बोली से प्राप्त राशि का उपयोग गांव के विकास पर किया जाएगा, जबकि पंचायत को दी जाने वाली ग्रांट अलग से मिलेगी। बोली लगाने की प्रक्रिया गुरुद्वारे से की गई घोषणा के बाद शुरू हुई, जिसके बारे में यह पता चला है कि आम आदमी पार्टी, कांग्रेस या शिरोमणि अकाली दल से कोई भी प्रतिनिधि बोली लगाने के लिए आगे नहीं आया।

इस मामले में सबसे पहले आत्मा राम ने 50 लाख रुपये की बोली लगाई, जिसके बाद जसविंदर सिंह ने 1 करोड़ की बोली दी। अंततः आत्मा सिंह ने 2 करोड़ की बोली लगाई। जब यह मामला सामने आया, तो इसका विरोध शुरू हुआ। ज्ञात रहे कि हरदोवाल की पंचायत, जो 300 एकड़ भूमि पर स्थित है, गांव के विकास कार्यों की जिम्मेदारी देखती है। पंचायत के भंग होने के बाद से गांव की युवा सभा, जिसमें 21 सदस्य हैं, सभी व्यवस्थाएं संभाल रही है। सभा ने फैसला लिया था कि इस बार जो व्यक्ति सर्वाधिक राशि देगा, उसे आम सहमति से सरपंच चुना जाएगा और प्राप्त धनराशि का इस्तेमाल गांव के विकास कार्यों में किया जाएगा।

इस मामले की स्थिति यह है कि जितनी गंभीरता से याचिकाकर्ता ने इस मुद्दे को उठाया है, उससे यह स्पष्ट होता है कि पंजाब में चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर सख्ती बरतने की जरूरत है, ताकि लोकतंत्र की सही भावना की रक्षा की जा सके।