मोहाली: पूर्व AIG के बांड से जमानतदार का हटना, कोर्ट ने दी हिरासत की मंजूरी!

हरियाणा के मोहाली में पूर्व एआईजी मालविंदर सिंह सिद्धू के जमानतदार गुरइकबाल सिंह ने मोहाली की अदालत में अपनी जमानत से हटने की याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने मंजूर कर लिया है। इस याचिका में गुरइकबाल ने स्पष्ट रूप से तर्क दिया कि सिद्धू इस समय एक अलग मामले में न्यायिक हिरासत में हैं, जिसके कारण वह उनके पेश होने की जिम्मेदारी से मुक्त होना चाह रहे थे। महत्वपूर्ण यह है कि गुरइकबाल ने मोहाली के पुलिस थाने फेज-8 में दर्ज एफआईआर संख्या 7/2024 में आरोपों के संदर्भ में जमानत वापस लेने की याचिका दाखिल की थी।

इस एफआईआर में भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 384 (विशेष मामले), 120-बी (साज़िश) और भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम (PC Act) की धारा 7 और 12 के तहत मामले दर्ज किए गए हैं। अदालत में सुनवाई के दौरान, आरोपी मालविंदर सिंह सिद्धू को बुड़ैल जेल से पुलिस हिरासत में पेश किया गया। इस मामले में गुरइकबाल ने जोर देकर कहा कि वह नए जमानत बांड को प्रस्तुत नहीं करना चाहते हैं, जो उनके मौजूदा जमानत की शर्तों के अनुरूप था।

अदालत ने गुरइकबाल की याचिका को स्वीकार करते हुए जमानत बॉंड को वापस लेने की अनुमति दी, जिससे उन्हें इस केस से मुक्त किया गया। इसके साथ ही, कोर्ट ने आरोपित मालविंदर सिंह सिद्धू को फिर से हिरासत में लेने का निर्देश दिया और उनके लिए हिरासत वारंट तैयार करने का आदेश दिया। इस पूरा घटनाक्रम के दौरान, यह भी ज्ञात हुआ कि सिद्धू के खिलाफ विजिलेंस अधीकारियों ने जांच के दौरान एक रिकॉर्डर बरामद किया था, जो इस मामले को और अधिक जटिल बनाता है।

गौरतलब है कि इस मामले में गुरइकबाल सिंह की याचिका से स्पष्ट होता है कि कानून में निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है और अदालत में उचित सुनवाई का प्रावधान है। इस प्रकार के मामले सामान्यतः समाज में नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं, लेकिन अदालत ने उचित कार्रवाई करते हुए सफलतापूर्वक इस मामले को सुलझाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब यह देखना होगा कि अग्रिम सुनवाई में इस मामले की और क्या नई जानकारी सामने आती है और आरोपों की सुनवाई का क्या दिशा होती है।

इस प्रकार, मोहाली की अदालत ने न केवल जमानतदार की याचिका स्वीकार की, बल्कि उसने कानून की प्रक्रिया का पालन करने के साथ-साथ आरोपित की हिरासत में लेने के आदेश भी दिए। अब सभी की नजर इस मामले की आगे की कार्रवाई पर बनी हुई है। यहां पर यह भी महत्वपूर्ण है कि कानून की भूमिका सुनिश्चित करना समाज के लिए आवश्यक है, ताकि न केवल न्याय मिल सके, बल्कि समाज में कानून और व्यवस्था भी बनी रह सके।