खेडां पंजाब दीयां: स्वर्ण विजेता की अनुशासन और मेहनत की चौंकाने वाली कहानी!
**भास्कर न्यूज | जालंधर** – पंजाब के जालंधर क्षेत्र में खिलाड़ियों को खेल के प्रति अपनी लगन को साबित करने के लिए कई तरह के संघर्षों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सामान्य परिवारों से आने वाले युवा खिलाड़ियों को अक्सर अपनी बेसिक जरूरतों, जैसे कि उचित आहार, को पूरा करने में कठिनाई होती है। इसी संघर्ष की कहानी है युवा बॉक्सिंग खिलाड़ी सौरव की, जिसने पिछले वर्ष एक गंभीर सड़क दुर्घटना का सामना किया लेकिन फिर भी साहस के साथ खेलना जारी रखा। सौरव ने हाल ही में जिला स्तरीय खेडां वतन पंजाब दीयां प्रतियोगिता में भाग लिया और 62 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल जीतकर राज्य चैंपियनशिप में जगह बनाई जो अगले महीने 12 तारीख को जालंधर में होगी।
जिला खेलों में सौरव ने कुल तीन मुकाबले खेले और सभी में बेहतरीन जीत हासिल की। वह जालंधर के स्पोर्ट्स कॉलेज में बीए-1 के छात्र हैं, जहां वे पढ़ाई के साथ सुबह और शाम बॉक्सिंग की प्रैक्टिस करते हैं। रात में वह एक प्राइवेट कंपनी में पिज्जा डिलीवरी ब्वाय के रूप में काम करके अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाते हैं। सौरव ने बताया कि उनके पिता लैदर कॉम्प्लेक्स में श्रमिक हैं और इसलिए वह घर की जरूरतों का भी ध्यान रखते हुए रात में 9 बजे से 1 बजे तक डिलीवरी का काम करते हैं। उनका मानना है कि बॉक्सिंग के लिए सही डाइट अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि एक खिलाड़ी को तकनीक के साथ-साथ शारीरिक ताकत की भी आवश्यकता होती है।
सौरव ने पिछले 7-8 सालों से बॉक्सिंग का प्रशिक्षण लिया है, लेकिन हाल के वर्षों में उनकी डाइट की जरूरतें और भी बढ़ गई हैं। वर्तमान में घर की वित्तीय स्थिति इतनी मजबूत नहीं है, और वह नहीं चाहते कि परिवार पर अधिक बोझ पड़े, इसी कारण वह डिलीवरी का काम करते हैं। प्रत्येक डिलीवरी से उन्हें 20 रुपये मिलते हैं, और वह रोजाना 150 से 200 रुपये कमा लेते हैं, हालांकि कुछ दिनों में यह राशि 100 रुपये तक भी सीमित रह जाती है।
पिछले साल स्टेट चैंपियनशिप में सौरव ने कांस्य पदक जीता था और अब जिला स्तर पर भी गोल्ड मेडल हासिल किया है। उनके पिता शाम लाल लैदर कॉम्प्लेक्स में काम कर रहे हैं और मां त्रिप्ता देवी घर संभालती हैं। जिला बॉक्सिंग कोच अरिहंत कुमार ने सौरव की विशेष तारीफ की और कहा कि वह उनके सेंटर का एक उत्कृष्ट खिलाड़ी हैं। उन्होंने बताया कि सौरव का नाम खेल विभाग के कॉलेज विंगों में भेजा गया है और जैसे ही उसका नाम सूची में शामिल होगा, उसे खेल विभाग की ओर से उचित आहार भी प्रदान किया जाएगा। खिलाड़ियों को नियमित रूप से प्रैक्टिस के साथ-साथ उचित पोषण की भी आवश्यकता होती है, जो उनकी परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने में मदद करती है।
सौरव की यह कहानी न केवल उनकी मेहनत और संघर्ष को दर्शाती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे वे एक सामान्य परिवार से होते हुए भी अपनी प्रतिभा और लगन के बल पर सफलता की ओर बढ़ रहे हैं। खिलाड़ियों को प्रोत्साहित करने और उन्हें सही तरीके से समर्थन देने की आवश्यकता है ताकि वे अपने सपनों को पूरा कर सकें।









