फाजिल्का में किसानों का हंगामा: पंजाब-राजस्थान हाईवे जाम, पीड़ितों को इंसाफ की मांग

फाजिल्का में किसानों ने पंजाब-राजस्थान हाईवे को जाम कर दिया है। किसानों ने फाजिल्का-अबोहर हाईवे के पास वनवाला गांव के समीप धरना देकर ट्रैफिक रोक दिया है, जिसके कारण भारी ट्रैफिक जाम हो गया है। प्रशासन ने ट्रैफिक को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने के लिए वैकल्पिक मार्ग निर्धारित किए हैं। हालांकि, गांव की लिंक सड़कों पर बड़े ट्रक सेब सहित अन्य सामान से भरे हुए खड़े हैं, जिससे ट्रक ड्राइवरों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धपुर के नेता लखविंदर सिंह और अन्य किसानों का कहना है कि फिरोजपुर में किसानों को दी गई भूमि का उन्हें मालिकाना हक मिला है, जिस पर वे खुदाई कर रहे हैं। हालांकि, इस क्षेत्र में ट्रांसफार्मर लगने और बिजली की सप्लाई सुनिश्चित होने के बावजूद वर्तमान सरकार द्वारा उनकी भूमि पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है। पिछले दिनों फिरोजपुर में एक धरने के दौरान एक किसान की मृत्यु हो गई, जबकि दूसरे किसान को पुलिस द्वारा हिरासत में ले लिया गया, जिसे बाद में इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां उसका उचित उपचार नहीं किया जा रहा है, जिससे उसकी सेहत बिगड़ती जा रही है।

किसानों के इस आंदोलन के कारण फाजिल्का में हाईवे जाम कर दिया गया है। किसान अपना यह धरना और सड़क जाम तब तक जारी रखेंगे जब तक उनकी आवाज सरकार तक नहीं पहुंच जाती। किसानों ने सरकार से निवेदन किया है कि फिरोजपुर के किसानों को न्याय मिलना चाहिए। इस स्थिति के चलते हाईवे पर ट्रैफिक जाम की समस्या बढ़ गई है, जिससे सेब व अन्य सामान से भरे ट्रक कई घंटों तक खड़े रहे।

बहुत से ट्रक चालकों ने अपनी परेशानी का इजहार करते हुए कहा है कि उन्हें पिछले कई घंटों से अपने ट्रकों में खड़े होना पड़ रहा है और उनके सामान खराब हो रहे हैं। उन्होंने किसान आंदोलन की समस्याओं का समाधान कराने की मांग की है ताकि रास्ता खुल सके। ट्रक ड्राइवरों का कहना है कि वे समझते हैं कि किसानों की चिंताएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उन्हें भी अपनी जिम्मेदारियों का ध्यान रखना होगा।

किसानों के आंदोलन की यह समस्या न केवल उनकी ही, बल्कि ट्रक चालकों और अन्य राहगीरों के लिए भी मुसीबत बन चुकी है। प्रशासन को चाहिए कि वह जल्द से जल्द इस मुद्दे का समाधान खोजे, ताकि सभी पक्षों के हितों का ध्यान रखा जा सके। किसान एकजुटता से अपनी मांगों को उठाने में लगे हुए हैं, और उनकी आवाज़ को सुनना वर्तमान समय की आवश्यकता है।