बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में पहली बार किसी आदिवासी मुख्यमंत्री के शामिल हाेने काे लेकर की जा रही है जाेरदार तैयारी

बस्तर दशहरा के मुरिया दरबार में पहली बार किसी आदिवासी मुख्यमंत्री के शामिल हाेने काे लेकर की जा रही है जाेरदार तैयारी

जगदलपुर, 12 सितंबर (हि.स.)। बस्तर संभाग मुख्यालय में 75 दिनाें तक चलने वाले रियासत कालीन बस्तर दशहरा पर्व हिंदू पंचाग के अनुसार हरेली अमावस्या तिथि काे पाट जात्रा पूजा विधान के साथ 4 अगस्त से शुरू हो चुका है, जो कि 19 अक्तूबर तक मनाया जाएगा। बस्तर दशहरा पर्व विभिन्न जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक भावना का महत्वपूर्ण प्रतीक है। बस्तर दशहरा उत्सव समिति द्वारा तिथिवार विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन के विषय में गुरुवार काे विस्तार से जानकारी दी गयी है।

ऐतिहासिक बस्तर दशहरा पर्व के दौरान बस्तर दशहरा को भव्य रूप देने के लिए बस्तर मड़ई, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स मीट, एक पेड़ बस्तर के देवी-देवताओं के नाम, बस्तर टूरिस्ट सर्किट, दसरा पसरा, नगरगुड़ी टेंट सिटी, टूरिज्म ट्रेवलर्स ऑपरेटर मीट, देव सराय, स्वच्छता पखवाड़ा जैसे विविध कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। इसी तरह 15 अक्तूबर को मुरिया दरबार का आयोजन होगा, जिसमें प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के शामिल हाेंने कर एक हजार प्रतिशत से भी अधिक संभावना है। मुरिया दरबार में विभिन्न जनजातीय समुदायों के प्रमुख, नेता और प्रशासनिक अधिकारी मिलकर संस्कृति, परंपरा और प्रथाओं को सहेजने और सामुदायिक मांग तथा समस्याओं पर विचार किया जाता है। मुरिया दरबार के आयोजन में अक्सर मुख्यमंत्री शामिल हाेते रहे हैं, इस बार ताे आदिवासी मुख्यमंत्री हाेने से उनके शामिल हाेने की और भी अधिक संभावना है। वहीं मुरिया दरबार पहली बार किसी आदिवासी मुख्यमंत्री के शामिल हाेने पर बस्तर के अनुसूचित क्षेत्र के लिए इसका महत्व और भी अधिक हाे जाता है, भाजपा मुरिया दरबार के माध्यम से बस्तर संभाग सहित पूरे प्रदेश के आदिवासी समुदाय काे अदिवासियाें के परंपरा व संस्कति के संरक्षण का एक संदेश भी देना चाहेगी, जिसे लेकर तैयारी भी जाेर-शाेर से जारी है।

इस दाैरान बस्तर के अनुसूचित क्षेत्र में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के एक अलग ही अंदाज में भव्य स्वागत की तैयारी की प्रशासनिक स्तर पर इसकी सुगबुगाहट देखी जा रही है। इस वर्ष 2024 में बस्तर दशहरा में एक नया अध्याय जुड़ सकता है।इसका अंदजा इसी से लगाया जा सकता है कि पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री अपने घर में बस्तर दशहरा काे लेकर बैठक कर निर्देश जारी करते हैं।

रियासत कालीन बस्तर दशहरा काे नये रूप नये कलेवर के साथ भव्यता प्रदान करने के लिए बस्तर दशहरा पर्व के अवसर पर जिला प्रशासन द्वारा कई अभिनव पहल की जा रही है। द बस्तर मड़ई के अंतर्गत बस्तर की प्राकृतिक सौन्दर्य, ऐतिहासिक एवं पुरातत्विक स्थलों, एडवेंचर स्थलों, सांस्कृतिक स्थलों से पर्यटकों को अवगत कराने के लिए प्रशासन द्वारा “द बस्तर मड़ई” की अवधारणा तैयार की गई है। बस्तर मड़ई के अंतर्गत 21 सितंबर को सामूहिक नृत्य कार्यक्रम, 21 सितंबर से 1 अक्तूबर तक बस्तर हाट-आमचो खाजा, 24 सितंबर को सिरहासार परिसर मैदान में बस्तर नाचा, 27 सितंबर को पारंपरिक लोक संगीत, 29 सितंबर को बस्तर की कहानियां एवं हास्य कवि सम्मेलन, 30 सितंबर को बस्तरिया नाचा जैसे कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों का आयोजन होगा, 2 अक्तूबर से बस्तर दशहरा की समाप्ति तक बस्तर के पारंपरिक व्यंजन के स्टॉल लगाए जाएंगे। बस्तर दशहरा पर्व के अंतर्गत इसी तरह तय कार्यक्रम के अनुसाार 2 अक्तूबर को काछनगादी पूजा विधान, रेलामाता पूजा विधान, 5 अक्तूबर से 10 अक्तूबर तक प्रतिदिन नवरात्रि पूजा विधान, रथ परिक्रमा पूजा विधान, 12 अक्टूबर को मावली परघाव विधान, 15 अक्टूबर को काछन जात्रा पूजा विधान और मुरिया दरबार, 16 अक्तूबर को कुटुम्ब जात्रा पूजा विधान, 19 अक्तूबर को मावली माता जी की डोली की विदाई पूजा विधान आयोजित है। इस वर्ष 15 अक्टूबर को मुरिया दरबार का आयोजन किया जायेगा। मुरिया दरबार आयोजन के 10 दिन बाद बस्तर संभाग के मांझी, चालकी, मेम्बर, मेम्बरीन, पुजारी, कोटवार, पटेल, मातागुड़ी के मुख्य पुजारियों का सम्मेलन आयोजित किया जाना प्रस्तावित है।

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