डीसी दफ्तर पर किसानों की हलचल: सरकार की अनदेखी और फेल सेंपल से मचा बवाल!
पंजाब के बरनाला जिले में भारतीय किसान यूनियन उगराहां से जुड़े किसानों ने डीएपी खाद की किल्लत के खिलाफ आज बरनाला के जिलाधिकारी (डीसी) कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। इस अवसर पर प्रदर्शनकारी किसानों ने पंजाब के मुख्यमंत्री के नाम एक मांग पत्र भी डीसी को सौंपा। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर उन्हें खाद की आवश्यक मात्रा नहीं मिली, तो वे भविष्य में और भी बड़े संघर्ष को तैयार रहेंगे।
किसान नेताओं रुप सिंह, चमकौर सिंह और बिंदरपाल कौर ने इस धरने के दौरान प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय किसान यूनियन उगराहां की अगुवाई में डीएपी खाद की कमी और इसके फेल सैंपलिंग के मुद्दे पर संघर्ष किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न तो केंद्र सरकार और न ही पंजाब सरकार इस खाद की कमी को पूरा करने में सक्षम हो रही है, जिसके परिणामस्वरूप किसानों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
किसान नेताओं ने यह भी बताया कि हाल ही में डीएपी खाद के नमूनों की जांच की गई थी, लेकिन उनकी सही जांच नहीं हो पाई है और अभी तक दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर सरकारें खाद की समस्या का समाधान नहीं करती हैं, तो यह स्थिति किसानों के लिए और भी गंभीर हो सकती है। किसानों की इस स्थिति को देखते हुए उन्होंने सरकार से त्वरित और प्रभावशाली कदम उठाने की मांग की है, ताकि उनकी कृषि गतिविधियों पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
इस प्रदर्शन का आयोजन उस समय किया गया है जब किसानों द्वारा पहले ही खाद की अनुपलब्धता को लेकर कई बार आवाज उठाई जा चुकी है। प्रदर्शनकारियों ने इस बात पर जोर दिया कि अगर डीएपी खाद की आपूर्ति में सुधार नहीं किया गया, तो उन्हें अपना आंदोलन तेज करना पड़ेगा। उनका कहना है कि खाद के बिना फसल की पैदावार पर गंभीर असर पड़ सकता है, जिससे न केवल उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी, बल्कि खाद्य सुरक्षा की समस्या भी उठ सकती है।
किसानों के इस आंदोलन ने एक बार फिर ध्यान आकर्षित किया है कि कृषि क्षेत्र में सरकारी नीतियों के प्रति गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है। उन्हें आशंका है कि अगर स्थिति गतिशील नहीं हुई, तो पंजाब के किसान और कृषि को गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इस प्रकार, किसानों की ओर से उठाए गए मुद्दे न केवल उनके बल्कि समग्र कृषि आर्थिक व्यवस्था के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं।









